मध्यप्रदेश शासन द्वारा इन चुनौतियों के समाधान के लिए भावांतर योजना-2025 एवं ई-मंडी योजना को एकीकृत डिजिटल ढांचे के अंतर्गत लागू किया गया है

एवीएस न्यूज. भोपाल
 कृषि विपणन प्रणाली में मूल्य अस्थिरता, पारदर्शिता की कमी तथा भुगतान में विलंब जैसी समस्याएं जो लंबे समय से किसानों की आय को प्रभावित करती रही हैं। मध्यप्रदेश शासन द्वारा इन चुनौतियों के समाधान के लिए भावांतर योजना-2025 एवं ई-मंडी योजना को एकीकृत डिजिटल ढांचे के अंतर्गत लागू किया गया है। ये योजनाएं किसानों को मूल्य संरक्षण, त्वरित भुगतान एवं पारदर्शी विपणन व्यवस्था प्रदान करने की दिशा में एक अभिनव पहल हैं। 


  भावांतर योजना-2025 : संकल्पना
मध्यप्रदेश राज्य कृषि विपणन (मंडी) बोर्ड के आयुक्त सह प्रबंध संचालक कुमार पुरुषोत्तम ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की मंशानुरूप लागू भावांतर योजना-2025 देश में प्रथम बार लागू की गई एक अभिनव योजना है, जिसका उद्देश्य किसानों को बाजार भाव में गिरावट से सुरक्षा प्रदान करना है। इस योजना के अंतर्गत न्यूनतम समर्थन मूल्य एवं वास्तविक विक्रय दर/मोडल रेट के मध्य अंतर की भरपाई सीधे किसान को की जाती है।

इस योजना की प्रमुख विशेषताएं
बाजार मूल्य में गिरावट से किसान की आय की सुरक्षा होती है । एमएसपी एवं विक्रय दर के अंतर की सीधी वित्तीय भरपाई योजना के मार्फत होती है। पंजीयन, विक्रय एवं भुगतान की सरल, पारदर्शी एवं पूर्णतः ऑनलाइन प्रक्रिया से होती है। भावांतर राशि का भुगतान किसानों के आधार लिंक्ड बैंक खाते में हस्तांतरित होता है। 


 6.4 लाख कृषकों के खाते में 1292 करोड़ रुपए राशि अंतरित हो चुकी 
विक्रय के 15 दिवस के भीतर भुगतान सुनिश्चित है। सोयाबीन खरीदी राज्य में 220 से अधिक मुख्य मंडियों एवं 80 उप-मंडियों में हुई। भावांतर की राशि सिंगल-क्लिक भुगतान व्यवस्था द्वारा त्वरित राशि अंतरण हुई। लाखों किसानों की सहभागिता के माध्यम से व्यापक प्रभाव दिखा। इस योजना अंतर्गत 9,36,352 कृषकों का पंजीयन हुआ। लगभग 6.4 लाख कृषकों के खाते में  1292 करोड़ रुपए राशि अंतरित हो चुकी है। 

  ई-मंडी योजना, ई-अनुज्ञा प्रणाली का विस्तारित एवं उन्नत डिजिटल स्वरूप 
ई-मंडी योजना, ई-अनुज्ञा प्रणाली का विस्तारित एवं उन्नत डिजिटल स्वरूप है। जिसका उद्देश्य मंडी की समस्त प्रक्रियाओं को रियल टाइम डेटा कैप्चरिंग के माध्यम से डिजिटल बनाना है। ई-मंडी की कार्यप्रणाली में किसान के प्रवेश से लेकर अनुबंध, तौल, बिक्री प्रमाणक एवं अनुज्ञा तक की संपूर्ण प्रक्रिया डिजिटल है।  पीओएस मशीन, टैबलेट, एंड्रॉयड मोबाइल आधारित एंट्री दर्ज होती है। तुलावटी द्वारा ऑनलाइन तौल एंट्री के साथ व्यापारी द्वारा डिजिटल बिक्री प्रमाणक जारी किया जाता है। एंड्रॉयड एवं वेब एप्लीकेशन आधारित प्रणाली (ऑनलाइन/ऑफलाइन कार्यक्षमता, आवक-जावक, नीलामी, तौल एवं भुगतान का एकीकृत डैशबोर्ड कृषि विपणन प्रणाली के पारदर्शिता को प्रदर्शित करती है। इसके साथ ही मंडी रिकॉर्ड का मैनुअल संधारण क्रमशः समाप्त हो चुका है। 


 प्रदेश की सभी 259 कृषि उपज मंडी समितियों में ई-मंडी योजना संचालित 
प्रदेश की सभी 259 कृषि उपज मंडी समितियों में ई-मंडी योजना संचालित है। 1 जनवरी 2026 से सभी 298 उप मंडियां ई-मंडी योजना संचालित, भावांतर योजना-2025 के अंतर्गत सोयाबीन की खरीदी ई-मंडी एप्लीकेशन के माध्यम से की जा रही है। योजना का विस्तार 87 उप-मंडियों तक किया गया है।

 योजना को  स्कोच गोल्ड अवॉर्ड-2025 मिल चुका है  
अब तक 40,23,519 कृषकों का पंजीयन, पारदर्शी, त्वरित एवं भरोसेमंद भुगतान प्रणाली, किसानों की आय में स्थिरता एवं भरोसा, स्कोच समूह, नई दिल्ली द्वारा "स्कोच ऑर्डर ऑफ मेरिट-2023" "स्कोच गोल्ड अवार्ड-2025 मिल चुका है।  कुल मिलाकर भावांतर योजना-2025 एवं ई-मंडी योजना मध्यप्रदेश शासन की किसान केंद्रित, तकनीक-आधारित और पारदर्शी कृषि विपणन व्यवस्था का सशक्त उदाहरण हैं। ये योजनाएं न केवल किसानों की आय सुरक्षा सुनिश्चित करती हैं, बल्कि कृषि विपणन को आधुनिक, डिजिटल एवं सुगम बनाकर राज्य की कृषि अर्थव्यवस्था को नई दिशा प्रदान करती