एवीएस न्यूज..भोपाल
राजधानी भोपाल सहित मध्यप्रदेश के व्यापारियों, करदाताओं, कर अधिवक्ताओं एवं कर पेशेवरों की विभिन्न समस्याओं के समाधान के लिए  टैक्स लॉ बार एसोसिएशन, भोपाल का एक प्रतिनिधिमंडल उपमुख्यमंत्री एवं वित्त एवं वाणिज्यिक कर मंत्री जगदीश देवड़ा से मिला और ज्ञापन सौंपा।

ज्ञापन में कर प्रशासन से जुड़ी तीन महत्वपूर्ण मांगों को प्रमुखता से उठाया गया है। इस मौके पर अध्यक्ष एडवोकेट मनोज कुमार पारख, सीए संजय श्रीवास्तव, सीए एस. कृष्णन (पूर्व अध्यक्ष) तथा मुनेंद्र वेद उपस्थित रहे।


एसोसिएशन के अध्यक्ष मनोज कुमार पारख ने बताया कि पहली मांग मध्यप्रदेश वैट की प्रथम अपीलों की सुनवाई की समय-सीमा 30 जून 2026 से बढ़ाकर 31 दिसंबर 2026 तक करने की है।

उन्होंने कहा कि बड़ी संख्या में पुराने प्रकरण अभी भी लंबित हैं और आवश्यक अभिलेखों एवं रिकॉर्ड के संकलन में समय लग रहा है। वर्तमान में वर्चुअल सुनवाई व्यवस्था के कारण प्रतिदिन सीमित मामलों की ही सुनवाई हो पा रही है, जिससे करदाताओं को पर्याप्त अवसर नहीं मिल पा रहा है।
 

लंबित अपीलों के त्वरित निराकरण के लिए  अधिकारी नियुक्ति करें  


ज्ञापन में दूसरी मांग वित्तीय वर्ष 2024-25 के लिए पेट्रोलियम उत्पादों से संबंधित मामलों में डीम्ड असेसमेंट स्कीम लागू करने की की गई है।

एसोसिएशन का कहना है कि इससे अनावश्यक जांच एवं स्क्रूटनी में कमी आएगी, अनुपालन प्रक्रिया सरल होगी तथा विभाग और करदाताओं दोनों का समय बचेगा।

तीसरी प्रमुख मांग मध्यप्रदेश वैट अपीलेट बोर्ड में लंबित अपीलों के त्वरित निराकरण के लिए आवश्यक अधिकारियों की शीघ्र नियुक्ति करने की है। ज्ञापन में उल्लेख किया गया कि अधिकारियों की कमी के कारण अपीलों की सुनवाई में अत्यधिक विलंब हो रहा है, जिससे व्यापारियों को आर्थिक एवं प्रशासनिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।


  व्यापारियों पर अनावश्यक दबाव या दंडात्मक कार्रवाई नहीं की जाए
प्रतिनिधिमंडल ने वित्त एवं वाणिज्यिक कर मंत्री जगदीश देवड़ा आग्रह किया कि जिन मामलों में विवादित राशि राज्य सरकार द्वारा सुरक्षित रखी गई है, उन मामलों में अपीलों के अंतिम निराकरण तक व्यापारियों पर अनावश्यक दबाव या दंडात्मक कार्रवाई नहीं की जाए। संस्था का मानना है कि इन मांगों को स्वीकार किए जाने से लंबित प्रकरणों का प्रभावी निस्तारण होगा, अनावश्यक मुकदमेबाजी में कमी आएगी, व्यापारिक वातावरण को मजबूती मिलेगी तथा राजस्व संग्रहण की प्रक्रिया को भी गति प्राप्त होगी।