विश्व पर्यावरण दिवस पर सीआईआई का बड़ा कदम : सीआईआई का ‘सार्थ’ मंच जलवायु कार्रवाई को देगा नई गति
एवीएस न्यूज ..भोपाल
भारतीय उद्योग परिसंघ ने बहु-हितधारक जलवायु कार्रवाई मंच ‘सार्थ’ की शुरुआत की है, जिसका उद्देश्य उद्योग, वित्तीय संस्थानों और नागरिक समाज के बीच समन्वय को मजबूत कर व्यावहारिक जलवायु अनुकूलन समाधानों को व्यापक स्तर पर लागू करना है।
विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर शुरू किए गए इस मंच का संचालन सीआईआई-आईटीसी सतत विकास उत्कृष्टता केंद्र द्वारा किया जा रहा है। यह पहल ऐसे समय में सामने आई है जब अत्यधिक गर्मी, जल संकट और आपूर्ति श्रृंखला में व्यवधान जैसी जलवायु चुनौतियां उद्योगों की उत्पादकता और निवेश निर्णयों को प्रभावित कर रही हैं।
‘सार्थ’ का उद्देश्य जलवायु जोखिम से जुड़ी जानकारी, अनुकूलन उपकरणों और वित्तीय संसाधनों तक बेहतर पहुंच सुनिश्चित करना है। इसके साथ ही यह मंच सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) की क्षमता बढ़ाने, आपूर्ति श्रृंखलाओं को मजबूत करने तथा प्रकृति-आधारित समाधानों को बढ़ावा देने पर भी ध्यान केंद्रित करेगा।
इस बहु-हितधारक गठबंधन में देश के कई प्रमुख उद्योग समूह संस्थापक सदस्य के रूप में शामिल हैं, जिनमें आईटीसी लिमिटेड, गोदरेज ग्रुप, आदित्य बिड़ला ग्रुप, महिंद्रा ग्रुप, जेएसडब्ल्यू ग्रुप, अडानी सीमेंट, लार्सन एंड टुब्रो, टाटा मोटर्स, डीसीएम श्रीराम, मैरिको, टाटा पावर, वर्धमान (जयंती), वेदांत-हिंदुस्तान जिंक और टाटा स्टील शामिल हैं।
इसके अलावा इस पहल को काउंसिल ऑन एनर्जी, एनवायरनमेंट एंड वॉटर (सीईईडब्ल्यू), एशियन डिज़ास्टर प्रिपेयर्डनेस सेंटर (एडीपीसी) और वर्ल्ड बिजनेस काउंसिल फॉर सस्टेनेबल डेवलपमेंट जैसे फ़ोर्स सपोर्टर का समर्थन प्राप्त है।
जमशेद गोदरेज, जो सीआईआई जलवायु परिवर्तन परिषद के अध्यक्ष भी हैं, ने कहा कि यह पहल मौजूदा संस्थागत प्रयासों और उद्योग, वित्तीय संस्थानों, शोध संस्थानों तथा नागरिक समाज के सहयोग को आगे बढ़ाने का काम करेगी। उन्होंने कहा कि यह केवल शुरुआत है और आगे चलकर यह मंच जलवायु कार्रवाई को और व्यापक स्तर पर मजबूती देगा।
अमन मित्तल ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे संरचित बहु-हितधारक प्रयास नीति निर्माण और निवेश योजनाओं के बीच मौजूद अंतर को पाटने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि ‘सार्थ’ जैसी पहलें भारत में जलवायु अनुकूलन और सतत विकास की दिशा में उद्योगों को एक साझा मंच प्रदान कर सकती हैं, जिससे न केवल पर्यावरणीय चुनौतियों का समाधान संभव होगा बल्कि दीर्घकालिक आर्थिक स्थिरता को भी बल मिलेगा।






