●    ई.वी अपनाने में आने वाली मुख्य बाधाएं लागत, ई.वी मॉडलों की सीमित उपलब्धता, चार्जिंग इन्फ्रास्ट्रक्चर और वाहन को लेकर विश्वास की कमी हैं। 


एवीएस न्यूज.भोपाल


 भारत के होमग्रोन मार्केटप्लेस, फ्लिपकार्ट ने आज ‘‘द लास्ट माईल लीपः एम्पॉवरिंग डिलीवरी फ्लीट्स टू एक्सेलरेट इंडियाज़ इलेक्ट्रिक मोबिलिटी ट्रांज़िशन’’ रिपोर्ट जारी की। इस रिपोर्ट के लिए भारत के लगभग 6,000 डिलीवरी पार्टनर्स का सर्वे किया गया। फ्लिपकार्ट की इस रिपोर्ट के मुताबिक, मध्य प्रदेश के डिलीवरी पार्टनर इलेक्ट्रिक मोबिलिटी में बहुत ज्यादा रुचि रखते हैं। सर्वे में शामिल 54 प्रतिशत डिलीवरी पार्टनर्स ने ई.वी अपनाने को लेकर इच्छा प्रकट की। इस सर्वे में मध्य प्रदेश में डिलीवरी पार्टनर्स द्वारा ई.वी एडॉप्शन की जबरदस्त संभावनाएं प्रदर्शित हुईं।


ई.वी को अपनाने की सबसे अधिक इच्छा डिलीवरी पार्टनर्स ने प्रदर्शित की
इस स्टडी में सामने आया कि डिलीवरी पार्टनर्स ई.वी अपनाने में बहुत ज्यादा रुचि रखते हैं। सर्वे में शामिल देश के लगभग 46 प्रतिशत डिलीवरी पार्टनर्स ने इलेक्ट्रिक वाहन (ई.वी) अपनाने की इच्छा प्रकट की। इससे प्रदर्शित होता है कि कार्यबल ई.वी अपनाने को पूरी तरह से तैयार है। लेकिन फिर भी इसका एडॉप्शन सीमित है। 94.3 प्रतिशत डिलीवरी पार्टनर अभी भी पेट्रोल पर चलने वाले टू-व्हीलर का इस्तेमाल करते हैं। इन नतीजों से प्रदर्शित होता है कि ई.वी को अपनाने की इच्छा और इसके वास्तविक एडॉशन में एक बड़ा अंतर है, जो खासकर संरचनागत रुकावटों के कारण है।
 

डिलीवरी पार्टनर्स ने जिन मुख्य दिक्कतों के बारे में बताया, वो हैंः
●    इलेक्ट्रिक वाहन की कीमत ज्यादा होना (26.6 प्रतिशत)।
●    कुछ स्थानों पर ई.वी की सीमित उपलब्धता (22.8 प्रतिशत)
●    रेंज और परफॉर्मेंस को लेकर संशय होना (17.8 प्रतिशत)
●    चार्जिंग की उपलब्धता (14 प्रतिशत)
●    परफॉर्मेंस की विश्वसनीयता (11.8 प्रतिशत)
●    सर्विसिंग और लाईफसायकल सपोर्ट (7 प्रतिशत)


ई.वी की क्षमताओं के अनुरूप ऑपरेशनल पैटर्न
इस रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि भारत में डिलीवरी ऑपरेशन वर्तमान में बाजार में उपलब्ध इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर्स की क्षमताओं के अनुरूप हैं। 
लगभग 29 प्रतिशत डिलीवरी पार्टनर्स प्रतिदिन 40 से 60 किलोमीटर की दूरी तय करते हैं, जबकि 21.8 प्रतिशत प्रतिदिन 60 से 80 किलोमीटर की दूरी तय करते हैं। ये दूरियाँ ज्यादातर इलेक्ट्रिक टूव्हीलर्स की रेंज में आती हैं, जो शहर में बार-बार रुककर तय की जाने वाली दूरियों को भी कवर करती हैं। राईडर्स के लिए फ्यूल की लागत भी एक बड़ा खर्च है। सर्वे में शामिल लगभग 90 प्रतिशत राईडर हर माह पेट्रोल पर 2,000 रुपये से 5,000 रुपये के बीच खर्च करते हैं। 
फ्लिपकार्ट ग्रुप के हेड, सस्टेनेबिलिटी, निशांत गुप्ता ने कहा, ‘‘फ्लिपकार्ट में सस्टेनेबिलिटी एक मूल्य आधारित परिवेश का निर्माण करने से जुड़ी है, ताकि पृथ्वी और हमारे प्लेटफॉर्म को संचालित करने वाले लोगों को उसका लाभ मिल सके। इलेक्ट्रिक वाहनों में आय को स्थिर बनाने के साथ ऑपरेटिंग खर्च को कम करने की विशाल क्षमता है। साथ ही अंतिम छोर तक डिलीवरी इलेक्ट्रिफिकेशन के लिए सबसे व्यवहारिक सेगमेंट्स में से एक है क्योंकि शहरों में यह काफी फैली हुई सेवा है, जिसका उपयोग बहुत ज्यादा होता है।’’ उन्होंने कहा, ‘‘हमारे अनुभव से ये नतीजे मिले हैं कि जब फाईनेंसिंग और चार्जिंग इन्फ्रास्ट्रक्चर और सर्विसिंग सपोर्ट जैसी सुविधाओं के साथ ई.वी को बढ़ावा दिया जाएगा, तो ई.वी अपनाने में तेजी से वृद्धि होगी और लोगों को आजीविका मिलने के साथ पर्यावरण की रक्षा भी होगी।’’
इस रिपोर्ट में पेश की गई इंडस्ट्री रिसर्च प्रदर्शित करती है कि इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर्स के उपयोग से फ्यूल और एनर्जी की लागत में 70 से 80 प्रतिशत तक की कमी लाई जा सकती है, वहीं कम मेटेनेंस के कारण डिलीवरी पार्टनर्स की आय 15 से 20 प्रतिशत बढ़ सकती है।

 

न्यूज़ सोर्स : राईडर्स के लिए फ्यूल की लागत भी एक बड़ा खर्च है। सर्वे में शामिल लगभग 90 प्रतिशत राईडर हर माह पेट्रो