सीआईआई ग्लोबल ट्रेड सिनेरियो समिट में वैश्विक व्यापार, सप्लाई चेन और आर्थिक साझेदारी पर मंथन


 एवीएस न्यूज.मुंबई 
भू-राजनीतिक बदलाव, बदलती सप्लाई चेन, तकनीकी विकास और सस्टेनेबिलिटी के कारण वैश्विक व्यापार का परिदृश्य तेजी से बदल रहा है। ऐसे समय में भारत के पास एक विश्वसनीय वैश्विक व्यापार भागीदार के रूप में अपनी स्थिति मजबूत करने का महत्वपूर्ण अवसर है। यह बात सीआईआई  वेस्टर्न रीजन के चेयरमैन एवं ब्लू स्टार लिमिटेड के चेयरमैन एंड मैनेजिंग डायरेक्टर वीर एस अडवाणी ने द 7वें सीआईआई  ग्लोबल ट्रेड सिनेरियो समिट को संबोधित करते हुए कही।


वीर अडवाणी ने कहा कि वित्त वर्ष 2025-26 में भारत का निर्यात 860 अरब अमेरिकी डॉलर से अधिक पहुंच गया है। उन्होंने कहा कि वैश्विक व्यापार में बदलती परिस्थितियों के बीच भारत को अपनी व्यापारिक क्षमता को और मजबूत करने के लिए लचीलापन, नवाचार, बाजारों में विविधता और मजबूत वैश्विक साझेदारियों पर ध्यान देना होगा। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में दुनिया की व्यापार व्यवस्था केवल पारंपरिक बाजारों तक सीमित नहीं है। भू-राजनीतिक परिस्थितियों, तकनीक, उत्पादन केंद्रों में बदलाव और सप्लाई चेन के पुनर्गठन का वैश्विक कारोबार पर व्यापक असर पड़ रहा है।  


 अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधियों ने भी रखे विचार
समिट में वैश्विक व्यापार को लेकर अंतरराष्ट्रीय दृष्टिकोण भी सामने आया। कार्यक्रम में सिंगापुर के कौंसुल जनरल मिंग फूंग चेओंग, ऑस्ट्रेलियन कौंसुलेट जनरल मुंबई के कौंसुल जनरल पॉल मर्फी तथा न्यूजीलैंड ट्रेड एंड एंटरप्राइज के कौंसुल जनरल ग्राहम राउज ने सहभागिता की। समिट में वक्ताओं ने कहा कि प्रभावी व्यापार समझौते केवल वस्तुओं के आयात-निर्यात तक सीमित नहीं होते। इनके माध्यम से बाजार तक पहुंच, निवेश, तकनीक, सेवाओं और वैश्विक वैल्यू चेन में एकीकरण के अवसर बढ़ाए जा सकते हैं।

विशेषज्ञों ने कहा कि बदलती वैश्विक परिस्थितियों में देशों के बीच मजबूत आर्थिक संबंध व्यापार को स्थिरता प्रदान कर सकते हैं। इसके लिए नीति-निर्माताओं और उद्योग जगत के बीच बेहतर समन्वय तथा दीर्घकालिक साझेदारी जरूरी है। समिट में इस बात पर भी चर्चा हुई कि भारत किस तरह वैश्विक कंपनियों के लिए भरोसेमंद व्यापारिक और विनिर्माण साझेदार के रूप में अपनी भूमिका मजबूत कर सकता है। इसके लिए सप्लाई चेन में विविधता, तकनीकी क्षमता, नवाचार और निर्यात बाजारों के विस्तार को महत्वपूर्ण माना गया।  


 केंद्रीय मंत्री जोशी ने दिया आत्मनिर्भरता भारत को मजबूती देने पर जोर 
 केंद्रीय नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा, उपभोक्ता मामले तथा खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्री प्रल्हाद जोशीमुंबई के जेडब्ल्यू मैरियट जुहू में आयोजित सीआईआई –एमएआरई ब्रिस 2026 सत्र में शामिल हुए। इस सत्र में भारत की ऊर्जा आत्मनिर्भरता, नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में निवेश के अवसर, ऊर्जा भंडारण, ग्रिड एवं ट्रांसमिशन की जरूरतों और उभरती तकनीकों पर चर्चा हो रही है।

इसके साथ ही देश में नवीकरणीय ऊर्जा से जुड़ी घरेलू विनिर्माण क्षमताओं को मजबूत करने पर भी विशेष जोर दिया जा रहा है। इस दौरान केंद्रीय मंत्री प्रल्हाद जोशी ने भारत की नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता को बढ़ाने, निवेश को आकर्षित करने और ऊर्जा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता को मजबूत करने से जुड़े मुद्दों पर सरकार की प्राथमिकताओं को सामने रखे जाने की उम्मीद है।