रिलायंस की कार्किनोस हेल्थकेयर ने हासिल की बड़ी उपलब्धि, एक लाख महिलाओं की एचपीवी डीएनए जांच पूरी
एवीएस न्यूज. मुंबई
महिलाओं में सर्वाइकल कैंसर की रोकथाम और समय पर पहचान को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि दर्ज करते हुए कार्किनोस हेल्थकेयर ने देशभर में एक लाख से अधिक महिलाओं की एचपीवी डीएनए जांच सफलतापूर्वक पूरी कर ली है।
यह कंपनी रिलायंस इंडस्ट्रीज़ लिमिटेड की 100 प्रतिशत स्टेप-डाउन सहायक इकाई है। इस उपलब्धि को भारत में सर्वाइकल कैंसर की स्क्रीनिंग, रोकथाम और उपचार सेवाओं की पहुंच बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
कंपनी ने विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) द्वारा अनुशंसित एचपीवी डीएनए जांच के आधार पर एक डिजिटल “कंटीन्यूम ऑफ केयर” मॉडल विकसित किया है। इस मॉडल के तहत जागरूकता, स्क्रीनिंग, ट्रैकिंग, ट्रायेज, मरीजों का मार्गदर्शन और उपचार तक निरंतर फॉलो-अप सुनिश्चित किया जाता है, ताकि किसी भी मरीज को उपचार प्रक्रिया से बाहर न होना पड़े।
कार्किनोस हेल्थकेयर की अर्ली डिटेक्शन एंड वीमेन वेलनेस सलाहकार एवं पद्मश्री सम्मानित विशेषज्ञ डॉ. नीरजा भाटला ने कहा कि एचपीवी डीएनए जांच सर्वाइकल कैंसर की पहचान के लिए सबसे विश्वसनीय माध्यमों में से एक है। उन्होंने कहा कि केवल जांच ही नहीं, बल्कि पॉजिटिव पाए गए मामलों को समय पर उपचार से जोड़ना भी उतना ही आवश्यक है।
वरिष्ठ ऑन्कोलॉजी सलाहकार डॉ. गौरा किशोर रथ ने कहा कि भारत में मुख्य चुनौती बीमारी की पहचान से अधिक उसकी समय पर जांच और उपचार तक पहुंच है। उन्होंने कहा कि छोटे शहरों और ग्रामीण क्षेत्रों तक गुणवत्तापूर्ण स्क्रीनिंग पहुंचाना इस दिशा में सबसे बड़ा कदम है।
वहीं कंपनी की चीफ ग्रोथ ऑफिसर (वीमेन वेलनेस) एवं डीसीसीएन प्रमुख श्रीप्रिया राव ने बताया कि यह उपलब्धि केवल एक आंकड़ा नहीं, बल्कि उन महिलाओं तक स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच का प्रमाण है, जो लंबे समय से जांच सुविधाओं से वंचित रही हैं। उन्होंने कहा कि यह लक्ष्य पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप , सीएसआर कार्यक्रमों, नर्स-सहायता प्राप्त और सेल्फ-सैंपलिंग मॉडल, जिला स्तरीय अभियानों और वंचित समुदायों तक विशेष पहुंच कार्यक्रमों के माध्यम से हासिल किया गया है।
कंपनी ने यह भी बताया कि इस अभियान को आगे बढ़ाते हुए अगले चरण में 10 लाख और दीर्घकालिक रूप से 10 करोड़ महिलाओं तक एचपीवी डीएनए जांच पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि तकनीक आधारित संगठित स्क्रीनिंग मॉडल भारत में सर्वाइकल कैंसर से होने वाली मौतों को काफी हद तक रोका जा सकता है और यह पहल सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली को नई दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।






