ऑल इंडिया मोटर एंड गुड्स ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन के अध्यक्ष ने कहा: युद्ध तनाव से भारत की अर्थव्यवस्था एवं ट्रांसपोर्ट उद्योग पर संभावित प्रभाव
एवीएस न्यूज.भोपाल
भारत सहित संपूर्ण विश्व इस समय मध्य-पूर्व में संयुक्त राज्य अमेरिका, इजराइल और ईरान के बीच बढ़ते युद्ध जैसे हालात को गहरी चिंता के साथ देख रहा है। इस प्रकार के अंतरराष्ट्रीय संघर्ष का सीधा प्रभाव वैश्विक अर्थव्यवस्था, ऊर्जा आपूर्ति और व्यापारिक गतिविधियों पर पड़ता है। भारत जैसे देश, जो अपनी ऊर्जा आवश्यकताओं का बड़ा हिस्सा आयात के माध्यम से पूरा करता है, उसके लिए ऐसी परिस्थितियां गंभीर आर्थिक चुनौती पैदा कर सकती हैं। यह बात ऑल इंडिया मोटर एंड गुड्स ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन के अध्यक्ष राजेंद्र कपूर ने कही।

कपूर के अनुसार यदि यह तनाव लंबे समय तक बना रहता है या युद्ध का दायरा बढ़ता है, तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तीव्र वृद्धि की संभावना है। भारत में पेट्रोलियम उत्पादों की कीमतें वैश्विक बाजार से प्रभावित होती हैं, इसलिए डीज़ल, पेट्रोल और अन्य ईंधन की कीमतों में वृद्धि का सीधा असर देश की परिवहन व्यवस्था और आम उपभोक्ता पर पड़ सकता है।
उन्होंने कहाकि भारत का सड़क परिवहन क्षेत्र देश की आर्थिक गतिविधियों की रीढ़ माना जाता है और देश में लगभग 85 प्रतिशत माल परिवहन ट्रकों के माध्यम से होता है। ट्रांसपोर्ट परिचालन में लगभग 55 प्रतिशत लागत केवल ईंधन पर निर्भर करती है। ऐसे में यदि डीज़ल की कीमतों में वृद्धि होती है तो ट्रक संचालन की लागत में भारी बढ़ोतरी होना स्वाभाविक है।
परिवहन महंगा हुआ तो आम उपभोक्ता आएगा महंगाई की चपेट में
कपूर ने कहाकि ईंधन महंगा हुआ तो माल भाड़े में वृद्धि होगी, लॉजिस्टिक्स लागत में बढ़ोतरी निश्चित है। इसके साथ ही आवश्यक वस्तुओं की कीमतों पर दबाव बढ़ेगा। व्यापार और उद्योग की लागत में वृद्धि होगी और छोटे ट्रांसपोर्टरों की आर्थिक स्थिति पर गंभीर दबाव बनेगा। यह प्रभाव अंततः आम उपभोक्ता तक पहुंचता है क्योंकि हर वस्तु की कीमत में परिवहन लागत शामिल होती है। इसलिए यदि ईंधन की कीमतों में लगातार वृद्धि होती है तो इसका प्रभाव खाद्य पदार्थों, निर्माण सामग्री, कृषि उत्पादों और दैनिक उपयोग की वस्तुओं की कीमतों पर भी दिखाई दे सकता है।
सरकार से मांग, परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए उठाएं यह कदम
उन्होंने कहाकि ऐसी परिस्थितियों में यह आवश्यक है कि सरकार और नीति-निर्माता समय रहते आवश्यक कदम उठाएं ताकि ट्रांसपोर्ट उद्योग पर अनावश्यक आर्थिक बोझ न पड़े और देश की आपूर्ति श्रृंखला प्रभावित न हो।
संगठन की ओर से भारत सरकार से मांग की
वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए डीजल पर करों की समीक्षा कर ट्रांसपोर्ट सेक्टर को राहत प्रदान की जाए। माल परिवहन क्षेत्र को आर्थिक स्थिरता देने के लिए आवश्यक नीतिगत सहायता प्रदान की जाए। टोल टैक्स और अन्य परिचालन लागतों में यथासंभव राहत पर विचार किया जाए। छोटे और मध्यम ट्रांसपोर्ट ऑपरेटरों को वित्तीय सहायता और आसान ऋण सुविधा उपलब्ध कराई जाए। देश की आपूर्ति श्रृंखला को सुचारु बनाए रखने के लिए ट्रांसपोर्ट उद्योग को रणनीतिक महत्व के क्षेत्र के रूप में देखा जाए।

