एवीएस न्यूज. मुंबई
अल्ट्रा मीडिया एंड एंटरटेनमेंट ग्रुप का OTT प्लेटफ़ॉर्म अल्ट्रा प्ले इस १८ नवंबर,को होने वाली वी. शांताराम की जन्मतिथि पर उनकी चुनिंदा फिल्में पेश कर रहा है। वी. शांताराम जी ऐसे फिल्मकार थे, जिन्होंने पर्दे को सिर्फ़ कहानी सुनाने का माध्यम नहीं, बल्कि कला, भावना और समाज के सच को जोड़ने वाला सशक्त माध्यम बना दिया।उनके लिए फ़िल्म सिर्फ़ मनोरंजन नहीं, क एहसास था, एक अनुभव था, एक बदलाव की शुरुआत थी। 
इस खास मौके पर, अल्ट्रा प्ले उनके कुछ आइकॉनिक और यादगार फ़िल्मों का एक स्पेशल कलेक्शन लेकर आ रहा है, दो आंखें बारह हाथ (1957), नवरंग (1959), झनक झनक पायल बाजे (1955), दहेज (1955), गीत गाया पत्थरों ने (1964), बूंद जो बन गई मोती (1967), जल बिन मछली नृत्य बिन बिजली (1971), और पर्वत पे अपना डेरा (1944)। हर फ़िल्म उनके उस दृष्टिकोण को दर्शाती है, जिसमें कहानी, संगीत, रंग और मानवीय भावनाएँ एक-दूसरे में घुल-मिलकर दर्शकों के दिल तक पहुँचती हैं।
भारत के महान फिल्मकारों का सम्मान करते हुए, , अल्ट्रा प्ले अपना #LegacyLivesOnअभियान आगे बढ़ा रहा है। इस डिजिटल पहल के ज़रिए वी. शांताराम जैसे दिग्गज फ़िल्मकारों को सोशल मिडिया के माध्यम से फिर से सुर्खियों में लाया जा रहा है। “माय फेवरेट फ्रेम” ट्रिविया और बिहाइंड द लेंस जैसी रील्स दर्शकों को उनकी कला, उनकी सोच और उनकी पर्दे के पीछे की यात्रा से फिर से जोड़ती हैं, जो आज भी उतने ही जीवंत हैं। #LegacyLivesOnके साथ, अल्ट्रा प्ले भारतीय सिनेमा की विरासत को जीवित रख रहा है — एक कहानी और एक फ्रेम के साथ।
इस जन्मतिथि पर अल्ट्रा मीडिया एंड एंटरटेनमेंट ग्रुप के CEO, सुशील कुमार अग्रवाल ने कहा:
“#LegacyLivesOnहमारे लिए सिर्फ़ एक अभियान नहीं है। यह भारतीय सिनेमा की यादों और उसकी असली खूबसूरती को ज़िंदा रखने का हमारा तरीका है। हम मानते हैं कि क्लासिक फ़िल्में पुरानी नहीं होतीं — वे आज भी हमें बहुत कुछ सिखाती हैं और नई पीढ़ी को प्रेरित करती हैं। इस ओटीटी प्लेटफ़ॉर्म के ज़रिए, हम इन महान फ़िल्मों और फ़िल्मकारों को फिर से दर्शकों तक पहुँचा रहे हैं, ताकि उनकी कला हमेशा ज़िंदा रहे।”

वी. शांताराम की फ़िल्में हमेशा कला और संवेदनशीलता के संगम पर खड़ी रहीं। नवरंग के काव्यात्मक रंगों से लेकर दो आंखें बारह हाथ की समाज को बदलने वाली सोच तक "उन्होंने भारतीय सिनेमा को नई ऊँचाइयों तक पहुँचाया। उनकी फ़िल्में याद दिलाती हैं कि हर अच्छी कहानी की असली ताकत इंसानियत में ही होती है—और सबसे खूबसूरत कहानियाँ वही होती हैं जो दिल से लिखी जाती हैं।"
इस उत्सव के साथ, अल्ट्रा प्ले ओटीटी भारतीय सिनेमा की अमूल्य विरासत को फिर से जीवंत करने के अपने मिशन को आगे बढ़ा रहा है। इस प्लेटफ़ॉर्म पर 1950 के स्वर्णिम दौर से लेकर 2000 के दशक की यादगार और लोकप्रिय हिंदी फ़िल्में उपलब्ध हैं। अल्ट्रा प्ले का उद्देश्य इन क्लासिक कहानियों को एक ही डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म पर सुरक्षित रखना है, ताकि आने वाली पीढ़ियाँ भी इन्हें देख सकें, महसूस कर सकें और समझ सकें कि भारतीय सिनेमा ने समय के साथ कैसी यात्रा की है ।