टैक्स लॉ बार एसो .के स्टडी सर्किल में विशेषज्ञ ने समझाई भविष्य की तस्वीर
नोटिस से लेकर अपील ड्राफ्टिंग तक तकनीक के इस्तेमाल का लाइव डेमो
- टैक्स प्रशासन के 2030 तक एआई आधारित होने का अनुमान
एवीएस न्यूज.भोपाल
टैक्स लॉ बार एसोसिएशन, भोपाल की मासिक स्टडी सर्किल बैठक में विशेषज्ञ ने 2030 तक टैक्स प्रशासन के एआई आधारित होने का अनुमान जताते हुए भविष्य की तस्वीर समझाई। बैठक का विषय टैक्स से जुड़े मुद्दे ,2030 में टैक्स एडमिनिस्ट्रेशन, और क्या एआई टैक्स लॉयर की जगह ले लेगा रहा।
कार्यक्रम में कर प्रशासन के बदलते स्वरूप और टैक्स प्रैक्टिस में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई ) की बढ़ती भूमिका पर चर्चा की गई।
कार्यक्रम के मुख्य वक्ता टैक्स प्रोफेशनल एवं स्पीकर सीए (डॉ.) हर्षित मुरलीधर ककवानी रहे। उन्होंने कहा कि वर्ष 2030 तक टैक्स एडमिनिस्ट्रेशन काफी हद तक एआईआधारित हो सकता है।
जीएसटी-13बी, ई-वे बिल रिकॉन्सिलिएशन, डीआरसी -01/01बी के जवाब, स्क्रूटिनी नोटिस तथा अपील ड्राफ्टिंग जैसे कार्य एआई बेहद कम समय में करने में सक्षम होगा।
- एआई असिस्टेंट है, रिप्लेसमेंट नहीं
डॉ. ककवानी ने कहा कि तकनीक के तेजी से बढ़ते इस्तेमाल के बावजूद एआई टैक्स लॉयर का पूर्ण विकल्प नहीं बन सकता। टैक्स मामलों में जजमेंट, कानून की व्याख्या, रणनीतिक निर्णय और क्लाइंट काउंसलिंग के लिए मानवीय विवेक और पेशेवर अनुभव की आवश्यकता बनी रहेगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि एआईहमारा असिस्टेंट है, रिप्लेसमेंट नहीं।
कार्यक्रम के दौरान डॉ. ककवानी ने टैक्स प्रैक्टिस में एआई के व्यावहारिक उपयोग का लाइव डेमो भी दिया। इसमें नोटिस की संक्षिप्त जानकारी तैयार करना, केस लॉ सर्च करना तथा रिप्लाई का ड्राफ्ट तैयार करने जैसे कार्यों को प्रदर्शित किया गया। इससे अधिवक्ताओं और सीए सदस्यों को टैक्स प्रोफेशन में एआई के संभावित उपयोग और उसकी सीमाओं को समझने में मदद मिली।
बड़ी संख्या में अधिवक्ता और सीए हुए शामिल
कार्यक्रम में टैक्स लॉ बार एसोसिएशन के अध्यक्ष मनोज पारेख, सचिव धीरज अग्रवाल, उपाध्यक्ष मयंक अग्रवाल, कोषाध्यक्ष दीपेश भंडारी, पूर्व अध्यक्ष मृदुल आर्य, वरिष्ठ सदस्य राजेश जैन एवं रूपेश जैन सहित बड़ी संख्या में अधिवक्ता और सीए सदस्य उपस्थित रहे।
स्टडी सर्किल बैठक में इस बात पर जोर दिया गया कि बदलती तकनीक के दौर में टैक्स प्रोफेशनल्स को एआई के उपयोग को समझने के साथ-साथ अपनी कानूनी विशेषज्ञता, विश्लेषण क्षमता और मानवीय निर्णय क्षमता को भी मजबूत करना होगा।


