ट्रांसपोर्ट व्यवसायी की मांग - नए वाहन खरीदने के लिए ब्याज सब्सिडी प्रदान की जाए
नीतियां दंडात्मक नहीं, बल्कि सहयोगात्मक, संवेदनशील और व्यावहारिक हों
एवीएस न्यूज.भोपाल
ट्रांसपोर्ट व्यवसायी बीएस-VI (भारत स्टेज 6) वाहनों को लेकर मिली-जुली प्रतिक्रिया दे रहे हैं। जहां एक ओर उन्नत तकनीक और कम प्रदूषण के फायदे हैं, वहीं दूसरी ओर उच्च लागत और तकनीकी जटिलताओं को लेकर चिंताएं भी हैं। ट्रांसपोर्ट व्यवसायी बीएस-VI को एक मजबूरी और तकनीक के बीच फंसा हुआ महसूस कर रहे हैं। इस संदर्भ में ऑल इंडिया मोटर एंड गुड्स ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन ने कहाकि मध्यप्रदेश सहित देशभर के ट्रांसपोर्टर बीएस-VI को लेकर पर्यावरण संरक्षण के विरोधी नहीं है , बल्कि केंद्र सरकार इस विषय पर गंभीरता, संवेदनशीलता और दूरदृष्टि के साथ निर्णय लें, ताकि लाखों ट्रांसपोर्ट व्यवसायियों और उनके परिवारों का भविष्य सुरक्षित हो सकें।

पुराने वाहन स्क्रैप करने के बाद खरीदे गए नए वाहनों पर जीएसटी में राहत दी जाए
ऑल इंडिया मोटर एंड गुड्स ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन के अध्यक्ष राजेंद्र कपूर ने कहा कि ट्रांसपोर्ट उद्योग देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है। माल परिवहन, आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति, उद्योग, व्यापार और रोजमर्रा की जिंदगी का सीधा संबंध ट्रक एवं बस ऑपरेटरों से है। ऐसे में किसी भी नई नीति को लागू करते समय ट्रांसपोर्ट व्यवसायियों की आर्थिक स्थिति, वर्षों की संघर्षपूर्ण यात्रा और जमीनी हकीकत को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। अत: संगठन सरकार से मांग करता है कि नए वाहन खरीदने के लिए पर्याप्त ब्याज सब्सिडी प्रदान की जाए। पुराने वाहन स्क्रैप करने के बाद खरीदे गए नए वाहनों पर जीएसटी में राहत दी जाए। इसके साथ ही स्क्रैप मूल्य को यथार्थवादी व सम्मानजनक बनाया जाए। यह योजना छोटे, मध्यम और एकल ट्रक ऑपरेटरों के लिए भी समान रूप से लागू हो और किसी भी कठोर निर्णय से पहले ट्रांसपोर्ट संगठनों से संवाद और परामर्श किया जाए।
चेयरमैन, आरटीओ एंड ट्रैफिक कमेटी एवं ऑल इंडिया मोटर ट्रांसपोर्ट के सीएल मुकाती ने कहाकि देश में बड़ी संख्या में ऐसे ट्रक ऑपरेटर हैं जिन्होंने बीएस-वन, बीएस-टू, बीएस-थ्री और बीएस-फोर श्रेणी के वाहन अत्यंत कठिन परिस्थितियों में खरीदे। तीव्र प्रतिस्पर्धा, बाजार की अस्थिरता, भाड़ों में गिरावट, डीजल की बढ़ती कीमतें तथा परिवहन विभाग, पुलिस और जीएसटी से जुड़े भ्रष्टाचार के कारण अधिकांश ट्रांसपोर्टर वर्षों तक नुकसान या बेहद कम मार्जिन पर अपना व्यवसाय चलाने को मजबूर रहे।

पूर्ण प्रतिबंध बड़ी संख्या में ट्रांसपोर्टरों को पुनःकर्ज के दलदल में धकेल देगा
सीएल मुकाती कहाकि कई ट्रक ऑपरेटरों ने भारी मानसिक, आर्थिक और पारिवारिक दबाव के बीच बैंकों की किश्तें किसी तरह पूरी की हैं। अब जबकि उनकी किश्तें पूरी हुई हैं और कुछ हद तक स्थिर कमाई की उम्मीद बनी है, ऐसे समय में यदि बिना वैकल्पिक समाधान दिए वाहनों पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया गया, तो यह बहुत बड़ी संख्या में ट्रांसपोर्टरों को पुनःकर्ज के दलदल में धकेल देगा। यह स्थिति न केवल आर्थिक संकट को जन्म देगी, बल्कि कई मामलों में मानसिक अवसाद, पारिवारिक विघटन और दुर्भाग्यपूर्ण रूप से जीवन समाप्त करने जैसी परिस्थितियां भी उत्पन्न कर सकती है, जिसकी जिम्मेदारी समाज और व्यवस्था दोनों पर होगी। अत: सरकार से मांग है कि वह अपने तकनीकी संसाधनों, अनुसंधान संस्थानों और ऑटोमोबाइल विशेषज्ञता का पुनः गहन अध्ययन कर यह सुनिश्चित करने का प्रयास करें।
पुराने वाहनों को पूर्णतः हटाने के बजाय रेट्रोफिटमेंट या इंजन परिवर्तन कर अनुमति दी जाए
ऑल इंडिया मोटर एंड गुड्स ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन के अध्यक्ष राजेंद्र कपूर ने कहाकि पुराने बीएस-वन,टू,थ्री और फोर श्रेणी के वाहनों को पूर्णतः सड़क से हटाने के बजाय, सरकारी सहायता से उनके इंजन में आवश्यक तकनीकी सुधार, रेट्रोफिटमेंट या इंजन परिवर्तन कर उन्हें नियंत्रित एवं कम प्रदूषण स्तर के साथ चलने की अनुमति दी जा सके। इससे पर्यावरण संरक्षण का उद्देश्य भी पूरा होगा और लाखों ट्रांसपोर्ट परिवारों की आजीविका भी सुरक्षित रहेगी।
गंभीरता, संवेदनशीलता और दूरदृष्टि के साथ निर्णय ले सरकार
मध्यप्रदेश सहित देशभर के ट्रांसपोर्टरों ने सरकार से मांग की है कि ट्रांसपोर्ट व्यवसायी पर्यावरण संरक्षण के विरोधी नहीं हैं। वे सरकार के साथ मिलकर स्वच्छ और सुरक्षित परिवहन व्यवस्था का निर्माण करना चाहते हैं, लेकिन यह तभी संभव है जब नीतियां दंडात्मक नहीं, बल्कि सहयोगात्मक, संवेदनशील और व्यावहारिक हों। पूर्ण विश्वास है कि केंद्र सरकार इस विषय पर गंभीरता, संवेदनशीलता और दूरदृष्टि के साथ निर्णय लेगी, ताकि पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ देश के लाखों ट्रांसपोर्ट व्यवसायियों और उनके परिवारों का भविष्य सुरक्षित रह सके।

