भारतीय कंस्ट्रक्शन इक्विपमेंट इंडस्ट्री ने वित्त वर्ष 26 में दिखाई मजबूती; निर्यात में 31.5% का उछाल,
एवीएस न्यूज . नई दिल्ली
इंडियन कंस्ट्रक्शन इक्विपमेंट मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन (आईसीईएमए) ने आज घोषणा की कि भारतीय कंस्ट्रक्शन इक्विपमेंट (सीई) इंडस्ट्री में वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान कुल इक्विपमेंट बिक्री में करीब 2% की गिरावट दर्ज की गई। कुल बिक्री वित्त वर्ष 25 के 1,40,191 यूनिट से घटकर 1,36,995 यूनिट रह गई। इंफ्रास्ट्रक्चर एग्जीक्यूशन की धीमी रफ्तार और प्रोजेक्ट्स में देरी से जुड़ी घरेलू बाजार की अस्थायी चुनौतियों के बावजूद, निर्यात में 32% के मजबूत उछाल ने इंडस्ट्री को संभाले रखा। भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा कंस्ट्रक्शन इक्विपमेंट बाजार बना हुआ है। वित्त वर्ष 25 में इस सेक्टर की अनुमानित वैल्यू 10 अरब डॉलर थी और 8.3% की सीएजीआर के साथ 2030 तक यह 14.76 अरब डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है।
आईसीईएमए के प्रेसिडेंट और जेसीबी इंडिया लिमिटेड के सीईओ एवं मैनेजिंग डायरेक्टर श्री दीपक शेट्टी ने कहा, "वित्त वर्ष 26 में जो मामूली गिरावट देखी गई है, उसे इंडस्ट्री की किसी बुनियादी कमजोरी के बजाय जमीनी स्तर पर इंफ्रास्ट्रक्चर एग्जीक्यूशन की धीमी रफ्तार के संदर्भ में देखा जाना चाहिए।
सरकारी कैपेक्स आवंटन ऐतिहासिक रूप से ऊंचे स्तर पर बना हुआ है, लेकिन प्रोजेक्ट एग्जीक्यूशन में देरी, भूमि अधिग्रहण की चुनौतियों और फंड जारी होने में देरी ने साल भर इक्विपमेंट की मांग पर असर डाला। साथ ही, एक्सपोर्ट में 32% की मजबूत बढ़ोतरी के साथ इंडस्ट्री ने अपनी मजबूती साबित की, जो भारत में बने कंस्ट्रक्शन इक्विपमेंट की बढ़ती वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता को दर्शाती है। हमें भारत के लगातार जारी इंफ्रास्ट्रक्चर विकास पर फोकस के चलते इंडस्ट्री की दीर्घकालिक विकास की राह पर पूरा भरोसा है।"
वित्त वर्ष 26 के मुख्य प्रदर्शन पर एक नजर
· कुल इक्विपमेंट बिक्री: 1,36,995 यूनिट, जो वित्त वर्ष 25 की तुलना में करीब 2% की गिरावट दर्शाती है
· घरेलू मांग (नॉन-ओईएमएक्सपोर्ट को छोड़कर): ज्यादातर इक्विपमेंट कैटेगरी में सालाना आधार पर करीब 7% की गिरावट
· निर्यात: प्रमुख इक्विपमेंट कैटेगरी में रिकॉर्ड स्तर तक पहुंचते हुए करीब 32% की मजबूत बढ़ोतरी
· आयात: मुख्य रूप से अर्थमूविंग, मटेरियल हैंडलिंग और कंक्रीट इक्विपमेंट में करीब 17% की बढ़ोतरी
· घरेलू मैन्युफैक्चरिंग की मजबूती: भारत में बिकने वाले 95% से ज्यादा इक्विपमेंट की मैन्युफैक्चरिंग घरेलू स्तर पर होती रही
सेगमेंट-वाइज परफॉर्मेंस
अर्थमूविंग इक्विपमेंट 97,236 यूनिट (वर्ष-दर-वर्ष −2%) के साथ करीब 71% मार्केट शेयर लेकर सबसे आगे रहा। मटेरियल हैंडलिंग इक्विपमेंट में 15,290 यूनिट (वर्ष-दर-वर्ष −10%) दर्ज किए गए। कंक्रीट इक्विपमेंट 14,486 यूनिट (+0.09% वर्ष-दर-वर्ष) के साथ लगभग स्थिर रहा। रोड कंस्ट्रक्शन इक्विपमेंट ने 7,445 यूनिट के साथ करीब 6.3% की पॉजिटिव ग्रोथ दर्ज की। मटेरियल प्रोसेसिंग इक्विपमेंट में 2,538 यूनिट के साथ करीब 1.2% की मामूली बढ़ोतरी हुई।
आईसीईएमएके प्रेसिडेंट डेजिग्नेट और रिटजेन इंडिया प्राइवेट लिमिटेड के मैनेजिंग डायरेक्टर एवं सीईओ श्री रमेश पलागिरी ने कहा, "भारतीय कंस्ट्रक्शन इक्विपमेंट इंडस्ट्री धीमे प्रोजेक्ट एग्जीक्यूशन और इंफ्रास्ट्रक्चर क्रियान्वयन की कमियों से जुड़ी अस्थायी चुनौतियों के बावजूद मजबूत बनी हुई है। इंडस्ट्री की दीर्घकालिक बुनियाद मजबूत है, जिसे इंफ्रास्ट्रक्चर विकास और मैन्युफैक्चरिंग ग्रोथ पर सरकार के फोकस से और ताकत मिल रही है। आगे चलकर इंडस्ट्री की रफ्तार बनाए रखने में समय पर प्रोजेक्ट अवॉर्ड, जमीनी स्तर पर तेजी से काम आगे बढ़ाना और बेहतर क्रियान्वयन दक्षता की अहम भूमिका होगी।"
इंफ्रास्ट्रक्चर एग्जीक्यूशन की धीमी रफ्तार ने घरेलू मांग को किया प्रभावित
घरेलू मांग पर एक साथ कई मोर्चों से दबाव पड़ा। भूमि अधिग्रहण में देरी और कम प्रोजेक्ट मिलने की वजह से नेशनल हाईवे निर्माण गतिविधि सात साल के निचले स्तर पर आ गई। जल जीवन मिशन (जेजेएम) का क्रियान्वयन फंड डिस्बर्समेंट में कमी के चलते धीमा पड़ गया। कॉन्ट्रैक्टर पेमेंट में देरी ने पूरे इंफ्रास्ट्रक्चर इकोसिस्टम में नकदी की तंगी पैदा कर दी। जनवरी 2025 से सीईवीस्टेज V एमिशन नॉर्म्स लागू होने से इक्विपमेंट की लागत में काफी बढ़ोतरी हुई, क्योंकि इंडस्ट्री में इक्विपमेंट खरीद के लिए कर्ज पर निर्भरता बहुत ज्यादा है। इसके अलावा, कच्चे तेल और बिटुमेन की बढ़ती कीमतों ने वित्त वर्ष 26 के आखिरी हिस्से में और मुश्किलें बढ़ाईं।
आईसीईएमए के वाइस प्रेसिडेंट और केस कंस्ट्रक्शन इक्विपमेंट इंडिया प्राइवेट लिमिटेड के भारत एवं सार्क मैनेजिंग डायरेक्टर श्री शलभ चतुर्वेदी ने कहा, "वित्त वर्ष 26 कंस्ट्रक्शन इक्विपमेंट इंडस्ट्री के लिए कुछ सेक्टर्स में धीमे प्रोजेक्ट एग्जीक्यूशन और इंफ्रास्ट्रक्चर की कमजोर रफ्तार की वजह से अस्थायी सुस्ती का साल रहा। हाईवे निर्माण गतिविधि में सुस्ती, प्रोजेक्ट अवॉर्ड में देरी और जल जीवन मिशन के क्रियान्वयन में कमी ने साल भर इक्विपमेंट की मांग को प्रभावित किया। हालांकि, इंडस्ट्री मजबूत बनी हुई है और दीर्घकालिक अवसरों को लेकर आशावादी है। भारत की इंफ्रास्ट्रक्चर विकास की कहानी भी मजबूत है और सेक्टर की विकास गति को वापस पटरी पर लाने के लिए प्रोजेक्ट्स का समय पर क्रियान्वयन, जमीनी स्तर पर तेजी से काम आगे बढ़ाना और कॉन्ट्रैक्टर्स के लिए बेहतर नकदी सहायता बेहद जरूरी होगी।
मजबूत एक्सपोर्ट ग्रोथ ने भारत की वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता को किया मजबूत
घरेलू चुनौतियों के बावजूद, एक्सपोर्ट एक बड़े ग्रोथ ड्राइवर के रूप में उभरा और ज्यादातर इक्विपमेंट कैटेगरी में वित्त वर्ष 25 के मुकाबले 32% की शानदार बढ़ोतरी दर्ज की। यह बेहतर क्वॉलिटी स्टैंडर्ड, प्रतिस्पर्धी कीमतों और बेहतर मैन्युफैक्चरिंग क्षमताओं की वजह से भारत में बने कंस्ट्रक्शन इक्विपमेंट की बढ़ती वैश्विक स्वीकार्यता को दर्शाता है। सीईवी स्टेज V एमिशन नॉर्म्स लागू होने से भारत वैश्विक नियामक मानकों के और करीब आया है, जिससे विकसित बाजारों में एक्सपोर्ट के अवसर और मजबूत हुए हैं।
लार्सन एंड टुब्रो लिमिटेड के एग्जीक्यूटिव वाइस प्रेसिडेंट एवं कंस्ट्रक्शन एंड माइनिंग मशीनरी बिजनेस हेड और आईसीईएमए इंडस्ट्री एनालिसिस एंड इनसाइट्स पैनल के कन्वेनर श्री विवेक हजेला ने कहा, "वित्त वर्ष 26 में दर्ज हुई मजबूत एक्सपोर्ट ग्रोथ वैश्विक बाजारों में भारतीय कंस्ट्रक्शन इक्विपमेंट की बढ़ती प्रतिस्पर्धात्मकता और स्वीकार्यता को दर्शाती है।
इंडस्ट्री के बुनियादी तत्व मजबूत बने हुए हैं और मौजूदा सुस्ती मांग की कमी के बजाय ज्यादातर एग्जीक्यूशन से जुड़ी चुनौतियों की वजह से है। जैसे-जैसे इंफ्रास्ट्रक्चर क्रियान्वयन में तेजी आएगी, प्रोजेक्ट एग्जीक्यूशन बेहतर होगा और प्रोजेक्ट अवॉर्डिंग गतिविधि में रफ्तार आएगी, इंडस्ट्री मजबूत विकास की राह पर वापस लौटने के लिए पूरी तरह तैयार है।"
यूनियन बजट 2026-27: कंस्ट्रक्शन इक्विपमेंट मैन्युफैक्चरिंग के लिए एक ऐतिहासिक मोड़
यूनियन बजट 2026-27 इंडस्ट्री के लिए एक ऐतिहासिक मोड़ साबित हुआ है। सरकार ने कंस्ट्रक्शन एंड इंफ्रास्ट्रक्चर इक्विपमेंट (सीआईई ) सेक्टर के लिए एक खास इंसेंटिव स्कीम की घोषणा की है, जो आईसीईएमए की लंबे समय से चली आ रही मांग को पूरा करती है। यह स्कीम हाई-टेक्नोलॉजी मैन्युफैक्चरिंग, ऑटोमेशन और प्रिसिजन इंजीनियरिंग को बढ़ावा देगी। इससे हाइड्रॉलिक्स, इंजन, ट्रांसमिशन सिस्टम और अंडरकैरेज पार्ट्स जैसे जरूरी पुर्जों का निर्माण देश में ही होगा, जिससे आयात पर निर्भरता घटेगी, प्रोजेक्ट की लागत कम होगी और बड़े पैमाने पर रोजगार पैदा होगा।
वित्त वर्ष 27 में सार्वजनिक कैपेक्स को बढ़ाकर 12.2 लाख करोड़ रूपए किया गया है। साथ ही डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर, सात हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर, 20 नए नेशनल वॉटरवेज और कोस्टल कार्गो प्रमोशन स्कीम से इंफ्रास्ट्रक्चर एग्जीक्यूशन में तेजी आएगी। साथ ही सभी कैटेगरी में इक्विपमेंट की मांग को भी सीधा फायदा मिलेगा।

