एवीएस न्यूज. नई दिल्ली 


एसएंडपी ग्लोबल इंडिया रिसर्च चैप्टर (आईआरसी) ने अपनी नवीतम रिपोर्ट “इंडिया फॉरवर्डः स्ट्रैटेजिक इंपरेटिव” में कहा है कि पश्चिम एशिया युद्ध से हुई ऊर्जा की कीमतों में वृद्धि और आपूर्ति बाधाएं भारत के लिए व्यापक आर्थिक दबाव पैदा कर रही हैं। इस संघर्ष ने वर्ष 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य से जुड़े ऊर्जा एवं खाद्य सुरक्षा सुधारों पर ध्यान केंद्रित किया है।

इस रिपोर्ट के कुछ प्रमुख निष्कर्ष इस प्रकार हैः भारत के व्यापक आर्थिक लचीलेपन की परीक्षा: पश्चिम एशिया युद्ध हाल के वर्षों में भारत की सहनशीलता की सबसे बड़ी परीक्षा है जिसमें अब तक के सबसे बड़े ऊर्जा संकट ने माल ढुलाई और बीमा लागत, आपूर्ति श्रृंखलाओं और उर्वरकों पर भी असर डाला है। 


भारत राजकोषीय और औद्योगिक नीति विकल्पों पर पुनर्विचार कर रहा: संघर्ष लंबा खिंचने से भारत का जोखिम प्रबंधन पर ध्यान, तत्काल बफर से मध्यम और दीर्घकालीन रणनीतियों की ओर जा रहा है। कोरोना के बाद भारत का राजकोषीय सुदृढ़ीकरण जिसमें राजकोषीय घाटा वित्त वर्ष 2021 में जीडीपी के 9.2 प्रतिशत से घटाकर वित्त वर्ष 2025-26 में जीडीपी के 4.4 प्रतिशत पर लाना था, अब सबसे कठिन चुनौतियों का सामना कर रहा है। 


भारत का ऊर्जा क्षेत्र- फिर से शुरुआत करने का क्षणः मौजूदा ऊर्जा संकट एक विश्वसनीय एवं लचीली ऊर्जा प्रणाली की जरूरत को रेखांकित करता है। जहां नीति निर्माता और नियामक सुधार के एजेंटा में तेजी ला सकते हैं, वहीं, वैश्विक ऊर्जा प्रवाह और आपूर्ति श्रृंखला पर भारतीय ऊर्जा बाजार की निर्भरता से परिवर्तन की गति संचालित होगी।


 इंडिया फॉरवर्ड रिपोर्ट एसएंडपी ग्लोबल और एसएंडपी ग्लोबल इंडिया लीडरशिप काउंसिल की एक चिंतन नेतृत्व पहल क्रिसिल के क्रॉस-डिविजन इंडिया रिसर्च चैप्टर द्वारा मिलकर तैयार की गई है जिसमें स्थानीय विशेषज्ञता, वैश्विक दृष्टिकोण और एसएंडपी ग्लोबल की पूर्ण क्षमताओं का समावेश है।