अंतर्राष्ट्रीय पुरुष दिवस: ज़ी टीवी के कलाकारों ने किया पुरुषों की मजबूती, संवेदनशीलता और जज़्बे को सलाम
एवीएस न्यूज. मुंबई
हर साल 19 नवंबर को मनाया जाने वाला अंतर्राष्ट्रीय पुरुष दिवस यानी इंटरनेशनल मेंन्स डे हमें अपनी जिंदगी के उन पुरुषों को धन्यवाद देने का मौका देता है जो चुपचाप, बिना कुछ कहे, ज़िम्मेदारियां निभाते रहते हैं। यह दिन उनकी ताकत, हिम्मत और नेकी को सलाम करने का है, साथ ही उन अंदरूनी संघर्षों को समझने का भी, जिन्हें वे अपने शांत चेहरे के पीछे छिपा लेते हैं। यह दिन हमें याद दिलाता है कि असली मजबूती कमजोरी को छुपाने में नहीं, बल्कि उसे स्वीकार करने के साहस में होती है। यह हमें प्रेरित करता है कि हम ऐसी जगहें बनाएं जहाँ पुरुष खुद को सुना हुआ, समझा हुआ और कदर किया हुआ महसूस करें।

इस मौके पर जी टीवी के कलाकार — ‘जागृति एक नई सुबह’ के आर्य बब्बर, ‘जगद्धात्री’ की सोनाक्षी बत्रा, ‘लक्ष्मी निवास’ के राजेंद्र चावला, ‘सरू’ की मोहक मटकर, ‘गंगा मई की बेटियां’ के शेजान खान, और ‘वसुधा’ के अभिषेक शर्मा व निशि सक्सेना — सभी इस दिन की अहमियत पर अपने विचार साझा कर रहे हैं।
आर्य बब्बर, जो ज़ी टीवी के शो ‘जागृति एक नई सुबह’ में कालीकांत का किरदार निभा रहे हैं, कहते हैं, “अंतर्राष्ट्रीय पुरुष दिवस हमें याद दिलाता है कि मर्द होना मतलब अपनी भावनाओं को ताकत के नकाब के पीछे छुपाना नहीं है। असली हिम्मत अपनी संवेदनाओं को स्वीकार करने में है, गहराई से महसूस करने में है, और अपने मूल्यों पर टिके रहने में है, चाहे कोई देख रहा हो या नहीं। मेरे लिए मर्दानगी का मतलब है करुणा, सम्मान, और दूसरों को ऊपर उठाने की क्षमता। आज के दिन उन सभी पुरुषों का सम्मान होना चाहिए जो दिल और दम दोनों से दुनिया का सामना करते हैं।”
सोनाक्षी बत्रा, जो ‘जगद्धात्री’ में मुख्य किरदार निभा रही हैं, कहती हैं, “हम अक्सर महिलाओं की ताकत और सहनशीलता की बात करते हैं, लेकिन उन पुरुषों को भी सराहना मिलनी चाहिए जो हमेशा हमारे साथ खड़े रहते हैं – पिता, भाई, दोस्त, जीवनसाथी – जो चुपचाप हमें संभालते हैं, बिना अपने बारे में सोचे। इस पुरुष दिवस पर मैं खासतौर से अपने पापा को धन्यवाद कहना चाहती हूं, जिन्होंने हमेशा मेरे लिए सबकुछ संभाला है। और मैंने महसूस किया है कि हमारे परिवारों में ऐसे कई पुरुष हैं जिन्हें मजबूत और भरोसेमंद बनने की इतनी सीख दी जाती है कि वे अपने एहसासों को महसूस करना ही भूल जाते हैं। अब वक्त है हम उन्हें यह बताएं कि उनके सपने, उनका दर्द और उनकी चाहतें भी उतनी ही जरूरी हैं। आइए ऐसा माहौल बनाएं जहाँ पुरुष खुलकर अपने मन की बात कह सकें और बिना झिझक अपने दिल की जगह पा सकें।”
राजेंद्र चावला, जो ‘लक्ष्मी निवास’ में श्रीनिवास की भूमिका निभा रहे हैं, कहते हैं, “बहुत सालों से पुरुषों को ये सिखाया गया है कि भावनाएं दिखाना कमज़ोरी है, लेकिन सच तो ये है कि अपनी भावनाएं ईमानदारी से स्वीकार करना सबसे बड़ी ताकत है। पुरुष दिवस पर मैं चाहता हूँ कि हम मर्दानगी को नए नजरिए से देखें – ज़िम्मेदारी, अपनापन और खुलापन। हमें ऐसी दुनिया बनानी चाहिए जहाँ पुरुष अपनी तकलीफ छुपाए बिना भी सम्मान पा सकें, और जहाँ दया को उतनी ही अहमियत मिले जितनी हिम्मत को।”
मोहक मटकर, जो ‘सरू’ में मुख्य भूमिका निभा रही हैं, कहती हैं, “आज का समय ऐसे पुरुषों की मांग करता है जो न सिर्फ मजबूत हों, बल्कि संवेदनशील भी हों। जो अपने एहसास कहने से न डरें। पुरुष दिवस उन पुरुषों को सलाम है जो अपनी ताकत के साथ नरमी भी रखते हैं, जो दूसरों का ध्यान रखते हैं और खुद का भी। यह दिन हमें याद दिलाता है कि पुरुष भी कई दबावों से गुजरते हैं, जिन पर बात होना ज़रूरी है। तभी हम एक संतुलित और समझदार समाज बना पाएंगे।”

अभिषेक शर्मा, जो ‘वसुधा’ में देवांश का किरदार निभा रहे हैं, कहते हैं, “बहुत से पुरुष चुपचाप बहुत कुछ सहते हैं – जिम्मेदारियां, डर, थकान, और अनकही भावनाएं। पुरुष दिवस पर मैं चाहता हूँ कि हम सभी इस चुपचाप निभाई जा रही हिम्मत को सराहें। पुरुष हमेशा तारीफ की उम्मीद नहीं रखते, पर उन्हें अपने प्रयासों और त्याग के लिए पहचान मिलनी चाहिए। आइए पुरुषों की मानसिक सेहत पर भी खुलकर बातें करें और उन्हें यह महसूस कराएं कि वे भी हमारी तरह देखे, सुने और समझे जाने के हकदार हैं।”
निशी सक्सेना, जो ‘वसुधा’ में नंदिनी की भूमिका निभा रही हैं, कहती हैं, “पुरुष हमारे जीवन में कई रूपों में मौजूद हैं – साथी, मार्गदर्शक, रक्षक, दोस्त – और अक्सर हम उनके भावनात्मक पक्ष को नजरअंदाज कर देते हैं। पुरुष दिवस हमें याद दिलाता है कि हमें उन्हें भी वही समझ, अपनापन और देखभाल देनी चाहिए जो वे दूसरों को देते हैं। आइए उन पुरुषों का सम्मान करें जो अपनी सादगी, गर्माहट और इंसानियत से रोशनी फैलाते हैं।”
शेज़ान खान, जो ‘गंगा माई की बेटियां’ में सिद्धू का किरदार निभा रहे हैं, कहते हैं, “मेरे लिए मर्दानगी अपनी ताकत साबित करने में नहीं, बल्कि अपने दिल और अपनी सच्चाई के साथ जीने में है। पुरुष दिवस पर मैं हर पुरुष को यह कहना चाहता हूँ कि वे अपनी भावनाएं खुलकर जताएं, अपनी बात बिना डर के कहें और अपनी संवेदनशीलता को कमजोरी न समझें। जब पुरुष महसूस करते हैं, समझते हैं और आगे बढ़ते हैं, तभी दुनिया बेहतर बनती है। आइए उन सभी पुरुषों का सम्मान करें जो खुद से ऊपर उठकर अपनापन चुनते हैं और खामोशी से ऊपर उठकर प्यार और समझदारी को जगह देते हैं।”

