मप्र कृषि आदान विक्रेता संघ के 25 हजार व्यापारियों ई-टोकन प्रणाली के विरोध में 


 एवीएस न्यूज.भोपाल
मध्य प्रदेश में कृषि आदान विक्रेता संघ और बड़ी संख्या में निजी खाद विक्रेता राज्य सरकार द्वारा जनवरी 2026 में लागू की गई ई-टोकन या ई-विकास प्रणाली का मध्यप्रदेश के 25 हजार व्यापारी विरोध कर रहे हैं।

इस प्रणाली के तहत किसानों को उर्वरक (खाद) लेने के लिए अब केवल ऑनलाइन टोकन (मोबाइल या कियोस्क के माध्यम से) की अनिवार्यता कर दी गई है, जिसका व्यापारी कड़ा विरोध कर रहे हैं। इसी को लेकर मध्य प्रदेश में कृषि आदान विक्रेता संघ ने जबलपुर हाईकोर्ट में ई-टोकन के विरुद्ध याचिका दायर की है।  


संगठन के अध्यक्ष मानसिंह राजपूत ने प्रदेश में जबरन थोपी गई की टोकन प्रणाली के विरोध स्वरूप जबलपुर हाईकोर्ट में एक रिट याचिका 22 जनवरी 2026 को दायर कर दी गई है। आरोप है कि यह नई व्यवस्था जटिल है, जिससे किसानों और व्यापारियों दोनों को असुविधा हो रही है। बिना ई-टोकन के खाद बेचने पर प्रशासन द्वारा कार्रवाई की जा रही है।

कृषि आदान विक्रेता संघ भोपाल के प्रदेश सचिव संजय कुमार रघुवंशी ने मध्यप्रदेश शासन से अपील की है कि संगठन के सदस्यों को छूट दी जाए। उन्होंने कहाकि जो हमारे संगठन का सदस्य नहीं है वह निजी व्यापारी हो या सोसाइटी उन्हें इस ई-टोकन के दायरे में रखा जाए, प्रदेश संगठन कोई आपत्ति नहीं है। 


 प्रदेश अध्यक्ष मान सिंह ने कहाकि मध्य प्रदेश सरकार द्वारा खाद की कालाबाजारी रोकने और भीड़ कम करने के लिए, 2026 की शुरुआत में 'ई-विकास' (वितरण एवं कृषि उर्वरक आपूर्ति समाधान) प्रणाली लागू की गई है। लेकिन जब 70/ 30 का रेशो तय है तो व्यापारियों पर ई-टोकन प्रणाली की बाद्धता लागू करना उचित नहीं है।

 उन्होंने कहाकि सोसायटियों में 70 फीसदी खाद उपलब्ध कराने के साथ एक्ट्रा छूट दिया जा रहा है लेकिन व्यापारियों को उपलब्ध 30 फीसदी खाद पर कोई एक्ट्रा छूट नहीं दिया जा रहा है, उपर से ई-टोकन प्रणाली की अनिवार्यता थोपी गई है जो न्यायोचित नहीं हैं।  कृषि आदान विक्रेताओं की समस्याओं और ग्रामीण क्षेत्रों में तकनीकी डिजिटल व्यवस्था को लागू करने की चुनौतियों को दर्शाता है।