एवीएस न्यूज . भोपाल


मध्यप्रदेश की बिजली कंपनियों में जारी मैनपावर आउटसोर्सिंग टेंडर अब बड़े विवाद का कारण बन गया है। 15 अप्रैल को जारी हुए करीब 1138 करोड़ रुपए के इस टेंडर में ऐसी शर्तें जोड़ी गई हैं, जिनसे चुनिंदा फर्मों को फायदा पहुंचाने के आरोप लग रहे हैं। सबसे बड़ा विवाद न्यूनतम सर्विस चार्ज को 5% से बढ़ाकर 10% किए जाने पर खड़ा हुआ है।

 

56 करोड़ की जगह अब 113 करोड़ का भुगतान

पिछले कई वर्षों से आउटसोर्सिंग टेंडरों में सर्विस चार्ज लगभग 5% रखा जाता था। लेकिन नए टेंडर में इसे न्यूनतम 10% तय कर दिया गया है।


इसका सीधा असर सरकारी खजाने पर पड़ रहा है—

पहले 1138 करोड़ के टेंडर पर लगभग 56 करोड़ रुपए सर्विस चार्ज देना पड़ता था।
अब यही राशि बढ़कर 113 करोड़ रुपए हो जाएगी।
यानी सिर्फ सर्विस चार्ज बढ़ाने से करीब 57 करोड़ रुपए का अतिरिक्त फायदा ठेकेदार कंपनियों को मिलेगा।


टेंडर की शर्तों पर गंभीर सवाल

टेंडर में शामिल कई शर्तों को लेकर नियमों के उल्लंघन और प्रतिस्पर्धा सीमित करने के आरोप लगाए जा रहे हैं।

मुख्य आरोप इस प्रकार हैं—

सामान्यतः 3 वर्ष का अनुभव मांगा जाता है, लेकिन इस टेंडर में 10 वर्षों में 5 वर्ष का अनुभव अनिवार्य किया गया।
1138 करोड़ के बड़े टेंडर के मुकाबले टर्नओवर पात्रता अपेक्षाकृत कम रखी गई।


केवल “एनर्जी सेक्टर” का अनुभव अनिवार्य करने से अन्य कंपनियों की भागीदारी सीमित होने के आरोप लगे।
न्यूनतम 10% सर्विस चार्ज तय करने को भंडार क्रय नियमों और पारदर्शिता सिद्धांतों के खिलाफ बताया जा रहा है।
आरोप है कि टेंडर की शर्तें पहले से तय किसी विशेष फर्म को लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से तैयार की गईं।


केंद्रीय सतर्कता आयोग के नियमों के उल्लंघन के आरोप

विवाद बढ़ने के बाद यह मामला केंद्रीय सतर्कता आयोग (CVC) और भारत सरकार के व्यय विभाग (Department of Expenditure) के दिशा-निर्देशों के उल्लंघन से भी जोड़ा जा रहा है।
टेंडर प्रक्रिया में पारदर्शिता और प्रतिस्पर्धा बनाए रखने वाले नियमों पर सवाल उठ रहे हैं।

जिम्मेदार अधिकारी जवाब देने से बचते दिखे

मामले में जब अधिकारियों से जवाब मांगा गया तो वे सीधे प्रतिक्रिया देने से बचते नजर आए।

पूर्व क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी के एमडी अजय गुप्ता ने कहा—

“इस बारे में सीजीएम संपदा सराफ से बात करिए।”

 

वहीं ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ने कहा—

“इस पूरे मामले की जानकारी मुझे नहीं है। फिर भी मैं इसे अपने स्तर से दिखवाने की कोशिश करता हूं।”

 

विपक्ष और ठेकेदारों में नाराजगी

टेंडर की शर्तों को लेकर कई ठेकेदारों और विभागीय सूत्रों में नाराजगी बताई जा रही है। आरोप है कि प्रतिस्पर्धा खत्म कर सरकारी धन का बोझ बढ़ाया जा रहा है। यदि मामले की निष्पक्ष जांच होती है तो बड़े स्तर पर अनियमितताओं का खुलासा हो सकता है।