फायर एनओसी प्रक्रिया होगी सरल, अधिकतम 4 स्टेप्स में मिलेगा अप्रूवल
एफएमपीसीसीआई की नगरीय विकास आयुक्त से बैठक
एवीएस न्यूज.भोपाल
फेडरेशन ऑफ मध्यप्रदेश चेम्बर्स ऑफ कॉमर्स एण्ड इंडस्ट्री (एफएमपीसीसीआई ) के नवनिर्वाचित प्रतिनिधि मंडल ने अध्यक्ष हिमांशु खरे के नेतृत्व में नगरीय विकास एवं आवास विभाग के आयुक्त संकेत एस. भोंडवे से मुलाकात की। इस बैठक में उद्योगों से जुड़े फायर एनओसी और संपत्ति कर से संबंधित नीतिगत मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की गई।
प्रतिनिधि मंडल ने उद्योगों को फायर एनओसी से छूट देने तथा प्रक्रिया को सरल बनाने की मांग रखी। इस पर आयुक्त ने आश्वासन दिया कि आगामी फायर एक्ट के लागू होने के बाद नियम निर्धारण के लिए फेडरेशन के प्रतिनिधियों को विस्तृत चर्चा हेतु आमंत्रित किया जाएगा।
आयुक्त ने संकेत दिया कि प्रस्तावित व्यवस्था के तहत नगर निगम सीमा के भीतर आने वाले उद्योगों को फायर एक्ट के दायरे से बाहर रखने पर भी विचार किया जा रहा है। उन्होंने यह भी बताया कि नगर निगम सीमा से बाहर के उद्योगों के लिए मैप अप्रूवल और फायर एनओसी की प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी और डिजिटाइज्ड की जाएगी, तथा इसे अधिकतम चार चरणों (4 स्टेप्स) में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है, ताकि समय और प्रक्रियागत देरी को कम किया जा सके।
संपत्ति कर नीति के युक्तिकरण पर चर्चा
बैठक में संपत्ति कर नीति पर भी विस्तार से चर्चा हुई। आयुक्त ने कहा कि विभाग यह सुनिश्चित करने का प्रयास कर रहा है कि उद्योगों पर दोहरे करारोपण की स्थिति न बने।उन्होंने बताया कि कई औद्योगिक क्षेत्रों में उद्योग पहले से ही लीज रेंट, मेंटेनेंस शुल्क और विकास शुल्क का भुगतान कर रहे हैं, जबकि स्थानीय औद्योगिक संघ सड़क, स्वच्छता, प्रकाश व्यवस्था और सुरक्षा जैसी आधारभूत सुविधाओं का स्वयं संचालन कर रहे हैं। ऐसी स्थिति में नीति को संतुलित और न्यायसंगत बनाने पर विचार किया जा रहा है। आयुक्त ने यह भी कहा कि नगरीय प्रशासन विभाग और उद्योग विभाग के बीच समन्वय स्थापित कर समाधान की दिशा में कार्य किया जाएगा।
प्रतिनिधि मंडल की उपस्थिति
इस अवसर पर फेडरेशन के प्रतिनिधि मंडल में अध्यक्ष हिमांशु खरे, संयुक्त अध्यक्ष वीरेन्द्र कुमार पोरवाल, डॉ. आरएस गोस्वामी, अशोक आनंद, प्रवीण आचार्य, डॉ. सुरेन्द्र सिंह और राजेश हिरवे शामिल रहे। फेडरेशन ने इस पहल को उद्योग हित में सकारात्मक कदम बताते हुए प्रशासन से शीघ्र ठोस नीति परिवर्तन की अपेक्षा जताई है।






