ट्रांसपोर्टरों, कमीशन एजेंट्स और वाहन मालिकों से भाड़े में 20 से 25 प्रतिशत तक वृद्धि की अपील


 एवीएस न्यूज.भोपाल


पेट्रोल-डीजल की लगातार बढ़ती कीमतों और परिवहन संचालन से जुड़े खर्चों में इजाफे को लेकर ट्रांसपोर्ट सेक्टर में चिंता गहराती जा रही है। ऑल इंडिया मोटर ट्रांसपोर्ट कांग्रेस (एआईएमटीसी ) के आरटीओ एवं ट्रैफिक कमेटी के चेयरमैन सीएल मुकाती ने ट्रांसपोर्टरों, कमीशन एजेंट्स और वाहन मालिकों से भाड़े में 20 से 25 प्रतिशत तक चरणबद्ध बढ़ोतरी करने की अपील की है। उन्होंने कहा कि ईंधन की कीमतों में लगातार वृद्धि के साथ-साथ यूरिया, टायर, ऑयल, ग्रीस, लुब्रिकेंट, टोल टैक्स और यूरो-6 तकनीक से जुड़े इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की लागत भी लगातार बढ़ रही है। मिडिल ईस्ट की परिस्थितियों का असर परिवहन उद्योग पर साफ दिखाई दे रहा है।
 

चालक-परिचालकों का वेतन देना भी मुश्किल 
सीएल मुकाती के अनुसार वर्तमान समय में परिवहन उद्योग गंभीर आर्थिक दबाव से गुजर रहा है। करीब 30 से 40 प्रतिशत वाहन खाली खड़े हैं, जबकि बढ़ती लागत के कारण ट्रांसपोर्ट कारोबार में बचत लगभग खत्म हो चुकी है। उन्होंने कहा कि वाहन मालिकों के लिए ईएमआई, बीमा, परमिट, टैक्स और चालक-परिचालकों का वेतन देना भी मुश्किल होता जा रहा है।
 

समय रहते भाड़ों में बढ़ोतरी नहीं हुई तो हजारों वाहन हो सकते हैं बंद 
उन्होंने चेतावनी दी कि यदि समय रहते भाड़ों में उचित बढ़ोतरी नहीं की गई तो हजारों वाहन बंद हो सकते हैं और कई ट्रांसपोर्टरों के बैंक खाते एनपीए की स्थिति में पहुंच सकते हैं। इससे देश की रसद व्यवस्था पर भी गंभीर असर पड़ सकता है। एआईएमटीसी ने सभी ट्रांसपोर्टरों और वाहन मालिकों से एकजुट होकर परिवहन उद्योग को बचाने के लिए सहयोग की अपील की है। 
 

सफर और ढुलाई के साथ बस किराया 20 फीसदी तक बढ़ने की आशंका
 ऑल इंडिया मोटर कांग्रेस के अध्यक्ष हरिश सबरवाल ने कहा कि ट्रांसपोर्ट कारोबार की 60 से 70 प्रतिशत लागत केवल ईंधन पर खर्च होती है, जो अब लगातार बढ़ती कीमतों के कारण असहनीय हो गई है। उन्होंने कहा कि ईंधन की कीमतें अब स्लो पॉइजन की तरह असर डाल रही हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि जब कच्चा तेल सस्ता था तब उसका लाभ आम जनता तक नहीं पहुंचा, जबकि अब महंगाई का पूरा बोझ ट्रांसपोर्ट सेक्टर पर डाला जा रहा है। साथ ही उन्होंने चेतावनी दी कि यदि जल्द राहत नहीं दी गई तो एक-दो हफ्तों में सडक़ों से बड़ी संख्या में बसें और ट्रक कम हो सकते हैं।


ट्रांसपोर्ट संगठनों ने सरकार से मांग की है कि बसों और ट्रकों पर टोल टैक्स माफ किया जाए तथा पेट्रोल-डीजल को जीएसटी के दायरे में लाया जाए, जिससे लागत कम हो सके। विशेषज्ञों और ट्रांसपोर्ट ऑपरेटरों का कहना है कि लंबी दूरी की यात्रा जैसे चार धाम यात्रा, तीर्थ स्थल और हिल स्टेशनों की बुकिंग पर भी इसका सीधा असर पड़ेगा और यात्रियों को 20 प्रतिशत तक अधिक खर्च करना पड़ सकता है। ट्रक ऑपरेटरों ने भी कहा कि बढ़ते खर्च के चलते ढुलाई दरें बढ़ाना अनिवार्य है, जिससे अंतत: इसका असर रोजमर्रा की वस्तुओं की कीमतों पर भी पड़ सकता है। कुल मिलाकर, ईंधन की बढ़ती कीमतें अब केवल ट्रांसपोर्ट सेक्टर ही नहीं बल्कि आम जनता के बजट को भी प्रभावित करने वाली हैं। ट्रांसपोर्टरों का कहना है कि अगर सरकार ने तुरंत कदम नहीं उठाया तो न सिर्फ यात्रा महंगी होगी, बल्कि पूरे अर्थव्यवस्था पर इसका बुरा असर पड़ेगा। आम जनता पहले ही महंगाई से परेशान है, और अब सडक़ सफर भी उसके लिए सिरदर्द बन सकता है। एसोसिएशन ने सरकार से मांग की है कि बस और ट्रकों के लिए टोल टैक्स माफ किया जाए और पेट्रोल-डीजल को जीएसटी के दायरे में लाया जाए ताकि दाम कम हो सकें।