स्पेशलिस्ट होने के बावजूद ट्रेनर डॉक्टर कर रहे मरीजों का इलाज
- आनंद नगर के हथाईखेड़ा रोड स्थित सिविल अस्पताल का मामला
- हर रोज आते हैं 200 से अधिक मरीज, कई ओपीडी और इलाज से असंतुष्ट
शिवनारायण सोनी, भोपाल
राजधानी के आनंद नगर के समीप हथाईखेड़ा रोड पर 100 बिस्तरों वाला सिविल हास्पिटल खुद बीमार है और इस अस्पताल को स्वास्थ्य मंत्रालय के द्वारा इलाज ही नहीं पूर्णत: सर्जरी की आवश्यकता है। क्योंकि शहर के पूर्वी दिशा में स्थित इस सिविल हास्पिटल में यहां पहुंचने वाले हर रोज 200 से अधिक मरीजों का इलाज ट्रेनर डॉक्टरों द्वारा किया जा रहा है। वह इसलिए कि अस्पताल में डाक्टरों अभाव है। हालांकि अस्पताल में 5 स्पेशलिस्ट चिकित्सक हैं जो सिर्फ दिशा-निर्देश दे रहे हैं।
गौरतलब है कि गोविंदुपरा विधानसभा क्षेत्र के वार्ड 62 में स्थापित करीब 20 करोड़ की लागत से निर्मित अस्पताल तीन साल पहले प्रभावशील हुआ। इस अस्पताल में पहले जहां हर रोज ओपीडी 15 से 20 थी, वह अब बढ़कर करीब 200 के पार पहुंच गई है। क्योंकि गोविन्दपुरा विधानसभा में इस सिविल हास्पिटल के मुकाबले एक भी इतना बड़ा एक भी सरकारी अस्पताल नहीं है, जिसमें लोगों को सभी सुविधा मिले। मगर पूर्व मुख्यमंत्री और क्षेत्रीय विधायक स्व.बाबूलाल गौर ने गोविन्दपुरा विधानसभा क्षेत्र में इसकी नींव रखी और मौजूदा क्षेत्रीय विधायक और मंत्री कृष्णा गौर के प्रयासों से यहां के रहवासियों को सर्वसुविधायुक्त सरकारी अस्पताल की सौगात मिली, लेकिन विडंबना यह कि सिविल अस्पताल में पर्याप्त अनुभवी चिकित्सक नहीं होने से यहां पहुंचने वाले मरीजों को समुचित इलाज नहीं मिल पा रहा है।
- हास्पिटल में 5 स्पेशलिस्ट और 8 मेडिकल ऑफीसर

यूं तो सिविल अस्पताल में 5 स्पेशलिस्ट डॉक्टर और 8 मेडिकल ऑफिसर हैं। इसके बावजूद अधिकांश ट्रेनिंग करने वाले डॉक्टर यहां पहुंचने वाले मरीजों का उपचार करते हैं। ट्रेनिंग करने वाले डॉक्टरों के इलाज से मरीजों का उपचार तो होता है, लेकिन समुचित नहीं, जबकि मौजूद स्पेशलिस्ट सिर्फ ट्रेनरों को परामर्श और दिशा निर्देश देने में व्यस्त रहतेे हैं।
- हम दो हफ्ते से अस्पताल आ रहे, पर नहीं मिल रहा आराम
यहां पहुंचने वाले मरीजों के हाल जानने जब एवीएस न्यूज ने इस अस्पताल का मुआयना किया तो खुलासा हुआ कि 20 करोड़ से बने इस अस्पताल में मरीजों को समुचित उपचार नहीं मिल रहा है। यहां पहुंचे मरीजों ने बताया कि ट्रेनर डॉक्टर ही इलाज कर रहे हैं और वे इस बात पर काफी नाराज दिखे। मरीजों ने बताया कि हम दो हफ्ते से अस्पताल में आ रहे हैं पर आराम नहीं मिल पा रहा है। इसके साथ ही कुछ मरीज ऐसे भी मिले, जिन्होंने बताया कि अस्पताल में चर्म रोग और हड्डी रोड से संबंधित सीनियर डॉक्टर ही नहीं हैं। उनका इलाज अन्य डॉक्टर ही कर रहे हैं।
- प्रभारी डॉक्टर ने किया समुचित इलाज का दावा
एवीएस न्यूज ने जब अस्पताल के प्रभारी डॉक्टर से बातचीत की तो उन्होंने बताया कि यहां सभी रोगों के स्पेशलिस्ट डॉक्टर हैं, और उपचार अच्छा किया जाता है। उन्होंने बताया कि जब में यहां आया था तो 15 से 20 मरीज ही आते थे, मगर अब 165 से 200 मरीज रोजाना अस्पताल में पहुंच रहे हैं। अस्पताल में मौजूद चिकित्सीय टीम द्वारा मरीजों का उपचार के पश्चात दवाइयां नि:शुल्क प्रदाय की जा रही हैं। इतना ही नहीं, मरीजों की जांचें भी नि: शुल्क प्रदाय हैं।
ट्रेनर डॉक्टरों पर बोले- हम उन्हें सिखाएंगे नहीं तो वे आगे कैसे बढ़ेंगे

ट्रेनर डॉक्टरों द्वारा किए जा रहे उपचार पर अस्पताल प्रभारी डॉ. संजय खरेे ने कहा कि हम उन्हें सिखाएंगे नहीं तो वे आगे कैसे बढ़ेंगे। उन्होंने कहा अस्पताल में जांच दो तरह से होती हैं, एक जो अस्पताल में होता है इमरजेंसी वाले हैं, जैसे हीमोग्लोबिन, मलेरिया, शुगर, एड्स के टेस्ट हैं जो हमारे यहां की जाती हैं। दूसरा हाफ स्कोप मॉडल में टेस्ट किए जाते हैं उसकी रिपोर्ट दूसरे दिन हमें मिल जाती है। हमारे अस्पताल में मरीजों को भर्ती करने की भी व्यवस्था है। मरीजों को किसी प्रकार की परेशानी न हो इसका भी पूरा ध्यान रखा जाता है।
- स्वच्छता और प्रसव सुविधाओं पर फोकस
अस्पताल प्रभारी डॉ. संजय खरे ने बताया कि अस्पताल में प्रसव कराने की भी पूर्ण सुविधा उपलब्ध है। वर्तमान में एक महिला प्रसव संबंधी उपचार के लिए अस्पताल में भर्ती है, जिसका विशेष देखभाल के साथ उपचार किया जा रहा है। अस्पताल में प्रतिमाह लगभग 7 से 8 महिलाएं प्रसव संबंधी उपचार के लिए पहुंचती हैं। उन्होंने बताया कि जटिल रोगों से पीड़ित मरीजों को प्राथमिक उपचार देने के बाद जय प्रकाश हास्पिटल या हमीदिया हास्पिटल रेफर किया जाता है।
- एक्स-रे मशीन खराब, मरीजों को हो रही परेशानी
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार अस्पताल में मरीजों की सुविधा के लिए लगाई गई एक्स-रे मशीन पिछले 20 दिनों से खराब होने के कारण बंद पड़ी है। इससे मरीजों को एक्स-रे जांच कराने के लिए बाहर भटकना पड़ रहा है। अस्पताल प्रभारी डॉ. संजय खरे ने बताया कि एक्स-रे मशीन का यूपीएस खराब हो गया है, जिसके चलते मशीन फिलहाल बंद है। उन्होंने कहा एक से दो दिन में मशीन ठीक हो जाएगी उसके बाद दोबारा शुरू होने की उम्मीद है। इसके बाद मरीजों को अस्पताल में ही एक्स-रे की सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी।
केस रिपोर्ट
केस-1
आनंद नगर निवासी रमेश मेहता अपनी पत्नी शांति के उपचार के लिए अस्पताल पहुंचे। मरीज को मासिक धर्म संबंधी समस्या थी, जिसमें पिछले दो महीनों से अधिक रक्तस्राव और पेट दर्द की शिकायत थी। डॉक्टर द्वारा प्रारंभिक जांच में गर्भावस्था परीक्षण (प्रेग्नेंसी टेस्ट) कराया गया, जिसकी रिपोर्ट नेगेटिव आई। इसके बावजूद डॉक्टर ने दोबारा जांच कराने की सलाह दी और मरीज को हल्के दर्द की दवा दी। परिजन के अनुसार उन्हें उपचार को लेकर कुछ भ्रम की स्थिति महसूस हुई।
केस-2
कोकता निवासी 45 वर्षीय रामलाल अहिरवार जोड़ों में दर्द की समस्या लेकर अस्पताल पहुंचे। मरीज को लगभग दो से तीन महीने से लगातार जोड़ों में दर्द की शिकायत थी। डॉक्टर द्वारा दवा लिखी गई और उपचार शुरू किया गया, लेकिन दो सप्ताह दवा लेने के बाद भी मरीज को किसी प्रकार का विशेष आराम नहीं मिला।
केस-3
कानासय्या निवासी रामप्यारे अपनी माता के उपचार के लिए अस्पताल पहुंचे। मरीज को चलने में कठिनाई और हाथ-पैरों में लगातार दर्द की समस्या है। परिजनों के अनुसार लगभग एक महीने से नियमित दवा लेने के बावजूद मरीज को स्थायी राहत नहीं मिल रही है। दवा का असर कुछ समय के लिए रहता है, लेकिन बाद में दर्द फिर से शुरू हो जाता है।
अस्पताल की कमियां दूर करने के प्रयास जारी
अस्पताल में मौजूद विभिन्न सुविधाओं और संसाधनों की कमियों को दूर करने के लिए शासन से लगातार मांग की जा रही है। उन्होंने बताया कि आवश्यक सुविधाओं से संबंधित प्रस्ताव प्रक्रिया में हैं और वह हर दो महीने में शासन को रिमाइंडर भी भेजते हैं। अस्पताल को जल्द ही आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध होंगी। साथ ही अस्पताल में सुरक्षा व्यवस्था का विशेष ध्यान रखा जा रहा है और मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं देने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। अस्पताल में जहां भी कमियां हैं, उन्हें सुधारने और आवश्यक व्यवस्थाएं पूर्ण करने का प्रयास किया जाएगा। यदि किसी मरीज या परिजन को किसी प्रकार की परेशानी है तो वे सीधे हमसे मिल सकते हैं, ताकि समस्या का समाधान किया जा सके। अस्पताल में सभी कर्मचारी टीम वर्क के साथ कार्य कर रहे हैं। अस्पताल की सेवाओं को और बेहतर बनाने के उद्देश्य से ‘राष्ट्रीय गुणवत्ता आश्वासन मानक’ (एनक्यूएएस ) प्रमाणन प्राप्त करने की दिशा में भी कार्य किया जा रहा है। स्टेट लेवल निरीक्षण के बाद अब अस्पताल को नेशनल लेवल पर प्रमाणित कराने का प्रयास किया जा रहा है, जिससे स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता और मजबूत हो सके।
डॉ. संजय खरे, मेडिकल स्पेशलिस्ट, प्रभारी, सिविल अस्पताल, गोविंदपुरा
वित्तीय वर्ष 2025-26 में हुई 2820 नेत्र रोगियों की जांच

वित्तीय वर्ष 2025-26 में कुछ 2820 नेत्र रोगियों की जांच की गई। इसमें से 461 वृद्धजनों को नजदीक कार्य के लिए नि:शुल्क चश्मे भी दिए गए हैं। वहीं वित्तीय वर्ष 2026-27 में अब तक 459 मरीज आंखों की जांच करवाने अस्पताल आए थे, जिनका परीक्षण किया। उनमें से 101 वृद्धजनों को आंखों की जांच कर चश्में उपलब्ध कराए गए हैं, जिससे वे अपने कार्य आसानी से कर सकते हैं। इसके साथ ही 2025-26 में 134 मरीज जो मोतियाबिंद और अन्य रोगों से पीडि़त थे, उन्हें जेपी अस्पताल और महीदिया अस्पताल इलाज के लिए रेफर किया है। आंखों से संबंधित बीमारियों के इलाज के लिए आने वाले मरीजों के आंखों की जांच कर उन्हें अवश्यकता के अनुसार चश्मों के नंबर भी दिए गए हैं। प्रदेश के 71 स्कूलों में शिविर लगाकर 15798 विद्यार्थियों के आंखों की जांच की है। इनमें से 427 विद्यार्थियों में दृष्टी दोष पाए जाने पर उन्हें दवाइयां दी और नि:शुल्क चश्में बाटे हैं।
डॉ. केपी शाक्य, नेत्र चिकित्सा अधिकारी,सिविल अस्पताल हथाइखेड़ा

