आत्माराम सोनी.भोपाल 
राजधानी के टीटी नगर स्थित दशहरा मैदान में विगत 18 नवंबर से शुरु हुआ भोपाल उत्सव मेला जो शहर वासियों के घूमने-फिरने और खरीदारी का एक ठिकाना है अपने शवाब पर है। राजधानी वासियों के  लिए महाउत्सव माना जाने वाला भोपाल उत्सव मेला अब एक ‘ब्रांड’ बन गया है। आज ‘भोपाल उत्सव मेला’ इतना लोकप्रिय हो चुका है कि निकटवर्ती राज्यों के व्यापारी भी इस मेले में शामिल होने लगे हैं। हजारों की संख्या में लोग यहां घूमने, फिरने और खरीदारी के लिए पहुंचते हैं। 

भोपाल उत्सव मेले में बड़ी संख्या लोगों ने पहुंचकर झूलों और व्यंजनों का आनंद उठाया
भोपाल उत्सव मेला समिति के अध्यक्ष मनमोहन अग्रवाल और महामंत्री सुनील जैन (जैनाविन) के अनुसार शहर के टीटी नगर दशहरा मैदान में आयोजित हर साल की तरह इस साल भी आयोजित भोपाल उत्सव मेला में खाने के व्यंजनों की ढेर सारी वैराइटी देखने को मिलेगी। इसके साथ ही रोमांच को नया रंग देने के लिए सबसे बड़े झूलों का भी भोपाली मजा ले सकते हैं। उन्होंने बताया कि बीते दिन यानि रविवार की शाम को भोपाल उत्सव मेले में बड़ी संख्या लोगों ने पहुंचकर झूलों और व्यंजनों का आनंद उठाया।
 

स्विंग वाले झूले भी यहां आकर्षण का केंद्र बने हुए
  मेले में एक झूले का किराया 50 से 100 रुपए के बीच रखा गया है। हालांकि इसमें ज्वाइंट झूला और रोलर कोस्टर जैसे झूले का किराया 250 रुपए तक पहुंच जाता है। साथ ही कुछ अलग-अलग तरह के स्विंग वाले झूले भी यहां आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं।

भोपाल मेले में परिवार संग मस्ती और रोमांच का आनंद 
इसके अतिरिक्त मेले में खाने-पीने के ढेर सारे अलग-अलग वैरायटी के स्टॉल्स भी लगे हुए हैं। राजधानी भोपाल में ठंड का सितम दिखने लगा है। इसी बीच आप भोपाल मेले में परिवार संग मस्ती और रोमांच का आनंद ले सकते हैं। इसके लिए आपको मेला स्थल से ही टिकट मिल जाएगी। यहां मौजूद खाने पीने की स्टाल के अलावा खरीदारी के लिए भी ढेर सारे अलग-अलग स्टॉल्स मौजूद हैं।

 महिलाओं के लिए अलग-अलग प्रकार की चूडिय़ां, कंगन और लाख के कड़े  
 इसमें खास तौर पर महिलाओं के लिए अलग-अलग प्रकार की चूडिय़ां कंगन और लाख के कड़े मौजूद है। कड़ाके की ठंड को ध्यान में रखते हुए यहां पर कश्मीरी शॉल पशमीना शॉल और कश्मीरी सलवार सूट भी आए हुए हैं। अलग-अलग दुकानों पर ढेर सारे शाल 200 रुपए से लेकर 20000 रुपए तक में मौजूद है। इसका अतिरिक्त जूते चप्पल की भी यहां ढेर सारी दुकान मिल जाती है। साथ ही महिलाओं के आकर्षण के लिए एक से बढक़र एक अलग-अलग लेटेस्ट डिजाइन के पर्स भी यहां मौजूद है।

समिति अध्यक्ष मनमोहन अग्रवाल के नेतृत्व में आयोजित मेला की व्यवस्था प्रबंधन द्वारा शानदार तरीके से मैनेज:सुनील जैन जैनाविन
भोपाल उत्सव मेला समिति के महामंत्री सुनील जैन जैनाविन ने बताया कि समिति अध्यक्ष मनमोहन अग्रवाल के नेतृत्व में आयोजित मेला की व्यवस्था प्रबंधन द्वारा शानदार तरीके से मैनेज की गई है। उन्होंने ने बताया कि इस मेले में विभिन्न प्रदेशों के स्वादिष्ट और प्रसिद्ध व्यंजन पेश किए जा रहे हैं। जयपुर से आए चूर्ण और रंग-बिरंगी गोलियां, जो बचपन की यादें ताजा कर देती हैं, खास आकर्षण का केंद्र बनी हुई हैं। इसके अलावा, राजस्थान आऐर उत्तर प्रदेश से आए अचार और मुरब्बे की 400 से अधिक वैराइटी को लोग बड़े चाव से खरीद रहे हैं और इनका स्वाद लेने के लिए लंबी कतारें लग रही हैं।
 
मेला में आध्यात्मिक चित्र प्रदर्शनी का स्टाल भी लगा
प्रजापिता ब्रह्मा कुमारीज ईश्वरीय शाखा नीलबड़ द्वारा भोपाल उत्सव मेला में एक आध्यात्मिक चित्र प्रदर्शनी का स्टाल लगाया गया है, जिसका शुभारंभ महामंत्री सुनील जैनाविन, अशोक गुप्ता ने किया। लगाई गई आध्यात्मिक चित्र प्रदर्शनी इस प्रदर्शनी में शिव कौन हैं? शिव के लिए लिंग या ‘ज्योतिर्लिंग’ शब्द का प्रयोग क्यों किया जाता है? शिव के साथ रात्रि का क्या सम्बंध है और आत्मा के संबध में बताया गया है। 

  समिति के इन पदाधिकारियों को असीम सहयोग 
भोपाल उत्सव मेला समिति के पदाधिकारी उपाध्यक्ष विजय अग्रवाल, राजेश जैन, चंद्रशेखर सोनी, महामंत्री सुनील जैनाविन,अशोक गुप्ता, अजय सोगानी, अनुपम अग्रवाल, प्रदीप अग्रवाल,सुमित गर्ग, कमल जैन, श्वेता नारायण सिंह कुशवाहा, डॉ.योगेंद्र मुखरैया, डॉ महेश गुप्ता, राजकुमार जौहरी, शैलेन्द्र निगम, प्रेम बाबू नाहर, वीरेंद्र जैन, प्रतीक गुप्ता आदि शामिल हैं।


वर्ष 1991-92 में शुरू हुआ मेला कर गया 33वें वर्ष में प्रवेश 
भोपाल उत्सव मेला समिति के महामंत्री सुनील जैनाविन बताया कि आज मेला 33 वें वर्ष में प्रवेश कर गया है। बताया कि  कि वर्ष 1991-92 में मात्र 70 स्टाल-दुकानों से प्रारंभ हुआ यह मेला, पिछले 3 दशकों से लगातार अपने ध्येय वाक्य ‘उत्सव, व्यापार, मनोरजंन एवं सेवा को सार्थक कर रहा है। 


 
मेला निभा रहा कलाकारों को मंच उपलब्ध कराने में एक सेतु की भूमिका 
कोषाध्यक्ष अशोक गुप्ता ने बताया कि मेले में फर्नीचर, ब्रांडेड इलेक्ट्रॉनिक्स शॉप, मीना बाजार, फूड, आधुनिक झूले, कपड़े, हैंडलूम,आटो मोबाइल, होम एप्लाइंसेस आदि के स्टॉल लगते हैं। भोपाल उत्सव मेला लोगों को रोजगार और व्यापार के अवसर उपलब्ध कराने के साथ ही कलाकारों को मंच उपलब्ध कराने में एक सेतु की भूमिका निभा रहा है। इस मेले में कई सांस्कृतिक कार्यक्रमों का भी आयोजन किया जाता है। 


समिति कर रही समाज कल्याण की दिशा में भी प्रभावी काम  
समिति के अजय सोगानी ने बताया कि भोपाल मेला उत्सव समिति समाज कल्याण की दिशा में भी प्रभावी काम कर रही है। मेला समिति द्वारा प्रतिवर्ष शिक्षा, स्वास्थ्य एवं सामाजिक सद्भाव से जुड़े कई कार्य किए जा रहे हैं। अपने 33वें वर्ष में मेला समिति ने व्यापार व मनोरंज के साथ ही मेले में सेवा का एक नया आयाम स्थापित करने का प्रयास भी किया है। यहां लगने वाले शिविर में रोगियों की जांच की जाती है।