पांच दिवसीय बैंकिंग सप्ताह लागू करने की मांग को लेकर बैंक कर्मियों ने किया प्रदर्शन
आगामी दिनों में और अधिक संघर्ष एवं राष्ट्रव्यापी बैंक हड़ताल के लिए तैयार
भोपाल। पांच दिवसीय बैंकिंग सप्ताह लागू करने की मांग को लेकर यूनाइटेड फोरम ऑफ़ बैंक यूनियंस द्वारा मंगलवार को राष्ट्रव्यापी प्रदर्शनों का आह्वान किया था। इसी तारतम्य में फोरम की स्थानीय भोपाल इकाई के आह्वान पर राजधानी भोपाल के सैकड़ों बैंक कर्मचारी और अधिकारी मंगलवार शाम 5:30 बजे पंजाब नैशनल बैंक जोनल ऑफिस अरेरा हिल्स भोपाल के सामने एकत्रित हुए। उन्होंने अपनी मांग के समर्थन में जोरदार नारेबाजी कर प्रभावी प्रदर्शन एवं सभा का आयोजन किया। सभा को फोरम मैं शामिल बैंक यूनियंस के पदाधिकारी वीके शर्मा, सुबिन सिन्हा, नजीर कुरैशी, निर्भय सिंह ठाकुर,संजय कुदेशिया, भगवान स्वरूप कुशवाहा, सुनील सिंह, वीएस नेगी, दीपक रत्न शर्मा, दिनेश झा, अनिल कुमार श्रीवास्तव आदि ने संबोधित किया।
वक्ताओं ने कहा कि आज हम यहां कोई औपचारिक सभा करने नहीं, बल्कि अपने अधिकार की माँग को बुलंद आवाज़ देने के लिए एकत्र हुए हैं।आज पूरा देश जानता है कि बैंक कर्मचारी देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं।चाहे नोटबंदी हो,कोरोना काल हो। जनधन–आधार–डीबीटी हो, या सरकार की हर योजना— बैंककर्मी सबसे आगे खड़े रहे, लेकिन विडंबना देखिए जो वर्ग देश की सेवा में दिन–रात लगा है, उसे आज भी पाँच दिवसीय बैंकिंग सप्ताह जैसे न्यूनतम और न्यायसंगत अधिकार के लिए सड़कों पर उतरना पड़ रहा है। देश के लगभग सभी सरकारी विभागों, बीमा क्षेत्र, आरबीआई, नाबार्ड, सेबी और अनेक निजी संस्थानों में पांच दिवसीय बैंक सप्ताह लागू है। तो सवाल यह है कि बैंक कर्मचारी इससे अलग क्यों? हमसे अधिक काम लेकर, कम सुविधा क्यों? आज बैंकों में स्टाफ की भारी कमी है, काम का दबाव असहनीय है, डिजिटल बैंकिंग के कारण काम के घंटे अनिश्चित हो गए हैं और ऊपर से हर विफलता का ठीकरा बैंक कर्मियों पर फोड़ा जा रहा है। पाँच दिवसीय बैंकिंग सप्ताह कोई विलासिता नहीं है।
जब तक हमारी माँग पूरी नहीं होगी,तब तक यह संघर्ष रुकेगा नहीं
यह है—कर्मचारियों के स्वास्थ्य का सवाल, परिवार और सामाजिक जीवन का सवाल, कार्यकुशलता और सेवा गुणवत्ता का सवाल। थका हुआ कर्मचारी अच्छी सेवा नहीं दे सकता—यह बात सरकार को समझनी होगी। आज का यह प्रदर्शन सरकार, वित्त मंत्रालय और बैंक प्रबंधन को स्पष्ट संदेश देता है कि बैंक कर्मियों को अनदेखा करना बंद करो। घोषित सहमति को मद्देनजर रखते हुए पाँच दिवसीय बैंकिंग सप्ताह तुरंत लागू करो। यूनाइटेड फोरम ऑफ़ बैंक यूनियंस का इतिहास संघर्ष और उपलब्धियों से भरा है। जब-जब अधिकारों पर हमला हुआ,हमने एकजुट होकर जवाब दिया।आज भी बैंक कर्मियों ने संकल्प लिया है कि जब तक हमारी माँग पूरी नहीं होगी,तब तक यह संघर्ष रुकेगा नहीं। अंत में उन्होंने बैंक कर्मियों को आह्वान किया कि एकजुट रहें, अफवाहों से दूर रहें और आने वाले दिनों में और अधिक संघर्ष एवं राष्ट्रव्यापी हड़ताल के लिए तैयार रहें।

