आगामी केंद्रीय बजट 2026-27 में एमएसएमई, उद्योग एवं व्यापार क्षेत्र को सशक्त बनाने : फेडरेशन ऑफ मप्र चेंबर्स ने वित्त मंत्री सीतारणम को भेजे 10 सूत्रीय सुझाव
आत्माराम सोनी.भोपाल
आगामी केंद्रीय बजट 2026-27 मध्यप्रदेश सहित देश के औद्योगिक, व्यापारिक एवं एमएसएमई क्षेत्र के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। देश की अर्थव्यवस्था में एमएसएमई क्षेत्र की महत्वपूर्ण भूमिका को दृष्टिगत रखते हुए उद्योगों के सर्वांगीण विकास, रोजगार सृजन तथा निर्यात संवर्धन के लिए फेडरेशन ऑफ मध्यप्रदेश चेंबर्स ऑफ कॉमर्स एण्ड इंडस्ट्री ने केंद्रीय वित्त निर्मला सीतारमण को 10 सूत्रीय सुझाव भेंजे है।
फेडरेशन ऑफ मध्यप्रदेश चेम्बर्स ऑफ कॉमर्स एण्ड इंडस्ट्री (एफएमपीसीसीआई) अध्यक्ष दीपक शर्मा ने बताया कि वित्त मंत्री को भेजे गए प्रमुख सुझाव में दस सूत्रीय बिंदुओं पर उनका ध्यान आकृष्ट किया गया है और मांग की गई है।
उद्योग विभाग का सुदृढ़ीकरण एवं विकेंद्रीकरण
देशभर में उद्योग विभाग को ग्रामीण स्तर तक अपग्रेड किया जाए, जिससे “एक छत के नीचे” सभी आवश्यक सेवाएँ उपलब्ध हो सकें।जिला स्तर पर निर्णय-प्रक्रिया को सशक्त एवं डिजिटल बनाया जाए।
औद्योगिक अवसंरचना एवं तकनीकी विकास
पुराने औद्योगिक क्षेत्रों के आधुनिकीकरण एवं हाई-टेक उन्नयन हेतु विशेष केंद्रीय फंड की व्यवस्था की जाए। प्रत्येक जिले में परीक्षण प्रयोगशाला एवं अनुसंधान एवं विकास केंद्र की स्थापना की जाए। ग्रामीण क्षेत्रों में लघु औद्योगिक क्लस्टर विकसित किए जाएँ, जिससे स्थानीय रोजगार को बढ़ावा मिले।
कर प्रणाली एवं जीएसटी सुधार
वर्तमान 18 फीसदी जीएसटी दर को घटाकर 12 फीसदी किया जाए। विद्युत पर लगने वाली ड्यूटी को जीएसटी में सम्मिलित किया जाए, ताकि उद्योगों को इनपुट टैक्स क्रेडिट का लाभ मिल सके। देशभर में विद्युत यूनिट चार्ज में एकरूपता लाई जाए।
एमएसएमई क्षेत्र के लिए विशेष प्रोत्साहन
एमएसएमई उद्योगों के लिए आयकर दर 10 से 15 फीसदी के बीच निर्धारित की जाए। एमएसएमई इकाइयों को 5 से 7 फीसदी की रियायती ब्याज दर पर ऋण उपलब्ध कराया जाए। कोलेटरल-फ्री ऋण सीमा 5 करोड़ से बढ़ाकर 10 करोड़ रुपये की जाए तथा ब्याज सब्सिडी में वृद्धि की जाए। 250 करोड़ रुपए तक के टर्नओवर वाले एमएसएमई के लिए कॉरपोरेट टैक्स 20 फीसदी किया जाए। जीएसटी कंपोजिशन स्कीम की सीमा 3 करोड़ रुपये तक बढ़ाई जाए तथा 10 करोड़ रुपए तक के टर्नओवर वाले उद्योगों को त्रैमासिक जीएसटी रिटर्न की सुविधा दी जाए।
नवीकरणीय ऊर्जा एवं हरित उद्योग प्रोत्साहन
उद्योगों में सोलर इंस्टॉलेशन को प्रोत्साहित करने के लिए 50 फीसदी तक सब्सिडी प्रदान की जाए। ऊर्जा-सक्षम मशीनरी के लिए ग्रीन लोन की विशेष व्यवस्था की जाए।
बैंकिंग एवं वित्तीय सुरक्षा
बैंकों द्वारा ली जाने वाली प्रॉपर्टी मॉर्गेज पर स्टांप ड्यूटी से पूर्ण छूट प्रदान की जाए। उद्योग मालिकों के लिए 10 लाख रुपए तक का बीमा कवर उपलब्ध कराया जाए। वरिष्ठ उद्योगपतियों के लिए पेंशन योजना प्रारंभ की जाए।
श्रम कानून एवं अनुपालन सरलीकरण
व्यापारियों एवं उद्योगों के लिए श्रम कानूनों एवं अनुपालन प्रक्रियाओं को सरल, पारदर्शी एवं व्यवहारिक बनाया जाए। निरीक्षण प्रणाली को डिजिटल एवं समयबद्ध किया जाए।
क्लस्टर, सीएफसी एवं कौशल विकास (नए सुझाव)
प्रत्येक जिले में मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर एवं कॉमन फैसिलिटी सेंटर (सीएफसी) स्थापित किए जाएं। औद्योगिक क्लस्टरों में कौशल विकास केंद्र एवं अप्रेंटिसशिप कार्यक्रम प्रारंभ किए जाएं।
निर्यात संवर्धन एवं “एक जिला-एक उत्पाद”
एमएसएमई निर्यातकों के लिए कस्टम प्रक्रियाओं को सरल किया जाए। ईसीजीसी को सशक्त बनाया जाए। “एक जिला-एक उत्पाद” तथा जीआई टैग उत्पादों को विशेष निर्यात प्रोत्साहन प्रदान किया जाए।
डिजिटलाइजेशन एवं स्टार्ट-अप प्रोत्साहन (नए सुझाव)
डिजिटल टूल्स पर सब्सिडी एवं ई-कॉमर्स इंटीग्रेशन को बढ़ावा दिया जाए। स्टार्ट-अप्स के लिए टैक्स अवकाश, विशेष फंड एवं सिंगल-विंडो क्लीयरेंस की व्यवस्था की जाए।
पूर्व विश्वास है उपर्युक्त सुझावों पर वित्त मंत्री विचार कर आगामी बजट में सम्मलित करेंगी
हमें पूर्ण विश्वास है कि उपर्युक्त सुझावों पर सहानुभूतिपूर्वक विचार कर आगामी केंद्रीय बजट 2026-27 में इन्हें सम्मिलित किया जाएगा, जिससे देश का उद्योग, व्यापार एवं एमएसएमई क्षेत्र और अधिक सशक्त होकर रोजगार सृजन, निर्यात वृद्धि तथा राष्ट्र निर्माण में अपना महत्वपूर्ण योगदान दे सकेगा।
दीपक शर्मा
अध्यक्ष, फेडरेशन ऑफ मध्यप्रदेश चेम्बर्स ऑफ कॉमर्स एण्ड इंडस्ट्री

