जीएसटी 2.0 के तहत नए एमआरपी दिशानिर्देशों पर तत्काल अनुपालन पर जोर
भोपाल। द इंस्टीट्यूट ऑफ चार्टर्ड अकाउंटेंट्स ऑफ इंडिया (आईसीएआई) की सेंट्रल इंडिया रीजनल काउंसिल की भोपाल शाखा द्वारा जीएसटी 2.0 और इसके व्यापक प्रभावों पर केंद्रित एक दिवसीय सेमिनार का सफल आयोजन किया गया। कार्यक्रम का प्रमुख आकर्षण हाल ही में जारी एमआरपी दिशानिर्देशों पर विस्तृत चर्चा रहा, जो 22 सितंतर से लागू होंगे।
सेमिनार में चार्टर्ड अकाउंटेंट्स, उद्योग विशेषज्ञों और शिक्षाविदों की भागीदारी रही। मुख्य वक्ताओं में सीए संदीप मुखर्जी, आईआरएस कात्यायनी संजय भाटिया (उप आयुक्त, वित्त मंत्रालय) तथा सीए नीरज अग्रवाल शामिल रहे।
विशेषज्ञों ने जोर दिया कि समय पर अनुपालन अनिवार्य है, अन्यथा लीगल मेट्रोलॉजी कानूनों के अंतर्गत दंड का सामना करना पड़ सकता है। साथ ही व्यवसायों से अपील की गई कि वे बिलिंग सिस्टम अपडेट करें, स्टॉक पर नए लेबल लगाएं और स्टाफ को प्रशिक्षित करें ताकि कार्यान्वयन सुचारु हो सके। सेमिनार का समापन इस आश्वासन के साथ हुआ कि आईसीएआई भोपाल शाखा अपने सदस्यों को जीएसटी 2.0 और नए एमआरपी अनुपालन ढाँचे में सहज रूपांतरण के लिए निरंतर पेशेवर सहयोग देती रहेगी।
- सेमिनार की मुख्य बातें
जीएसटी 2.0 में 12 फीसदी और 28 फीसदीकी दरें हटाकर कर संरचना को सरल बनाया गया है। अब दरें मुख्य रूप से 5फीसदी, 18फीसदी और लग्जरी/सिन वस्तुओं पर 40 फीसदी होंगी। इसके अलावा लीगल मेट्रोलॉजी (पैकेज्ड कमोडिटीज) नियम, 2011 के तहत जारी परिपत्र के अनुसार निर्माता, आयातक और पैकर्स को बिना बिके स्टॉक का एमआरपी संशोधित करना अनिवार्य होगा ताकि नए जीएसटी दरें परिलक्षित हों।
नया एमआरपी स्टाम्प, स्टिकर या ऑनलाइन प्रिंटिंग से दर्शाया जा सकता है। पैकेजिंग पर पुराना और नया एमआरपी दोनों साफ-साफ अंकित होना चाहिए। पुराने रैपर/पैकेजिंग का उपयोग 31 दिसम्बर 2025 तक या स्टॉक खत्म होने तक किया जा सकता है। उपभोक्ताओं को नई कीमतों की सूचना विज्ञापन/सार्वजनिक नोटिस के माध्यम से दी जानी चाहिए। उपभोक्ता लाभ: इन नियमों का उद्देश्य पारदर्शिता सुनिश्चित करना, ओवरचार्जिंग रोकना और कर कटौती का सीधा लाभ उपभोक्ताओं तक पहुंचाना है।

