डिज़ाइन से मैन्युफ़ैक्चरिंग तक भारत के पथ निर्माण के लिए बैंगलुरु में आरंभ हुआ
एवीएस न्यूज.बेंगलुरु
इलेक्ट्रॉनिक्स सिस्टम डिज़ाइन और मैन्युफैक्चरिंग (ईएसडीएम) सेक्टर हेतु देश के प्रधान उद्योग निकाय, इंडिया इलेक्ट्रॉनिक्स एंड सेमीकंडक्टर एसोसिएशन (आईईएसए) ने 25 फरवरी 2026 को बैंगलुरु के लीला भारतीय सिटी कन्वेंशन सेंटर में आईईएसए विज़न समिट 2026 का उद्घाटन किया। इंडस्ट्री, सरकार और एकेडेमिया के सबसे तेज़ दिमागों को एकजुट करने वाले दो दिवसीय समिट - ’’डिज़ाइन टू मैन्युफैक्चरिंगः सिनर्जी ऑफ प्रोडक्ट, प्रोडक्शन एंड स्किल’’ - ने भारत के प्रोडक्ट नेशन बनने के सपने में एक बड़े बदलाव का इशारा दिया।
उद्घाटन समारोह को सरकार के नेताओं, उद्योग जगत के प्रतिष्ठित व्यक्तियों और दिग्गजों के एक प्रतिष्ठित समूह ने संबोधित किया, जिनमें शामिल थेः श्री अमितेश कुमार सिन्हा, (सीईओ, इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन और अतिरिक्त सचिव, इलेक्ट्रॉनिकी और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय); श्री मनीष चड्ढा (जेएस, वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय, भारत सरकार); डॉ एम एम त्रिपाठी (डीजी-एनआईईएलआईटी), राहुल शरणप्पा, (आईएएस, निदेशक, आईटीबीटी विभाग, कर्नाटक सरकार), महामहिम, इवाउट डी विट, महावाणिज्यदूत, नीदरलैंड दूतावास, अजीत मनोचा, अध्यक्ष, सेमी, गिलरॉय मैथ्यू (सीईओ, यूएसटी), अशोक चांडक, प्रेसिडेंट, आईईएसए, रुचिर दीक्षित, आईईएसए चेयरपर्सन, वीपी और कंट्री मैनेजर सीमेंस ईडीए; प्रोफेसर तुम्माला राव, आईडीएसपीएस और एमिरेटस प्रोफेसर जॉर्जिया टैक्स सलाहकार आईएसएम।
एक थीम जो एक आंदोलन को परिभाषित करती है
2026 संस्करण की थीम - ’’डिज़ाइन टू मैन्युफैक्चरिंगः सिनर्जी ऑफ प्रोडक्ट, प्रोडक्शन एंड स्किल’’ - इंडस्ट्री लीडरों के मुताबिक, आज भारत के इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर के सामने सबसे बड़ी चुनौती और अवसर हैः विश्व स्तरीय चिप और प्रोडक्ट डिज़ाइन क्षमता और स्केलेबल, उच्च-क्वालिटी घरेलू मैन्युफैक्चरिंग के बीच के अंतरा को भरना।
आईईएसए के प्रेसिडेंट अशोक चांडक ने अपने उद्घाटन भाषण में कहाकि भारत पहले ही सेमीकंडक्टर डिज़ाइन में वैश्विक लीडरशिप दिखा चुका है। अगला कदम स्पष्ट है - हमें वैल्यू चेन पूरी करनी होगी। हमें उस वृद्धि को बनाए रखने के लिए बिना किसी समझौते के क्वालिटी और बहुत कुशल कार्यबल के साथ बड़े पैमाने पर विश्व स्तरीय उत्पाद रचने, निर्माण और मैन्युफैक्चर करने होंगे। भारत के पास दुनिया को सशक्त करने के लिए इंजीनियरिंग प्रतिभा है। अब हमें साहस से इनोवेट करने का पक्का इरादा, प्रतिस्पर्धी तरीके से मैन्युफैक्चर करने का अनुशासन और अपने लोगों को लगातार कुशल बनाने के दूरगामी नजरिए की जरूरत है - सिर्फ भारत के लिए ही नहीं, बल्कि वैश्विक टेक्नोलॉजी ईकोसिस्टम के लिए भी।
आईईएसए के चेयरपर्सन रुचिर दीक्षित ने कहाकि ’आईईएसए विज़न समिट, पिछले कुछ सालों में, एक कॉन्फ्रेंस से कहीं ज्यादा बन गया है - यह एक ’नेशनल कन्वर्जेंस प्लैटफॉर्म’ बन गया है जहां विचार, सहभागिता, नीति, नवाचार और निष्पादन एक साथ मिलकर असली असर डालते हैं। यह समिट ’उद्योग के अग्रणियों, सरकार के नीति निर्माताओं, वैश्विक निवेशकों, स्टार्ट-अप इनोवेटर्स, शिक्षा जगत और ईकोसिस्टम पार्टनर्स’ को एक साथ लाता है - सभी एक ही मकसद से एकजुट हैं: ’भारत को सेमीकंडक्टर डिज़ाइन, मैन्युफैक्चरिंग और इनोवेशन के लिए एक ग्लोबल हब में बदलना।’’
अमितेश कुमार सिन्हा, सीईओ और अतिरिक्त सचिव, आईएसएम, इलेक्ट्रॉनिकी और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने कहा, ’’भारत की इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग ग्यारह सालों में छह गुना बढ़ी है- यह नीतिगत इरादे, इंडस्ट्री के भरोसे और वैश्विक साझेदारी पर बनी नींव है। हम अपने सेमीकंडक्टर मिशन के अगले चरण में आगे बढ़ रहे हैं, और हम ऐसा दीर्घकालिक इरादे के साथ कर रहे हैं। भारत विभिन्न एआई एप्लीकेशंस डिज़ाइन करने पर काम कर रहा है। इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी मंत्रालय के तहत एनएसएम एआई के लिए ज़रूरी इंफ्रास्ट्रक्चर के डिज़ाइन और डैवलपमेंट पर काम कर रहा है।
आईएसएम 2.0 में, डिज़ाइन, मैन्युफैक्चरिंग और पैकेजिंग के लिए सहयोग जारी रहेगा और सेमीकंडक्टर ईकोसिस्टम डैवलपमेंट के लिए इसे और बढ़ाया जाएगा। कटिंग ऐज टेक्नोलॉजी और स्किलिंग में अनुसंधान एवं विकास (आर एंड डी) पर भी प्रमुख रूप से ध्यान केन्द्रित किया जाएगा। इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन सिर्फ एक सरकारी पहल नहीं है, यह सभी स्टेकहोल्डर्स का सफर है जिसका लक्ष्य एक मज़बूत, भरोसेमंद और भविष्य हेतु तैयार सप्लाई चेन बनाना है जो सिर्फ एक देश में ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया में स्थिरता लाए।’’

