अपोलो सेज में मरीज को बनाया बंधक, साढ़े 5 लाख का एस्टीमेट देकर थमाया साढ़े 11 लाख बिल

- आंखों में इन्फेक्शन बताकर शुरुआत में जमा कराए तीन लाख, पहले 5 लाख का, फिर 7 लाख किया एस्टीमेट
- 181 के सीएम हेल्पलाइन में शिकायत पर जवाब - हम प्राइवेट अस्पताल की नहीं दर्ज करते हैं शिकायत
भोपाल - राजधानी के सबसे बड़े निजी अस्पताल अपोलो सेज की अमानवीयता और असंवेदनशील चेहरा का चेहरा उजागर हुआ है। अस्पताल में मरीज का आंखों का आॅपरेशन किया गया और साढ़े 11 लाख रुपए का बिल थमा दिया, जबकि शुरूआत में एस्टीमेट साढे़ 5 लाख रुपए का दिया था। 3 लाख जमा करने के बाद भी मरीज को बंधक बनाकर डिस्चार्ज करने से इनकार कर दिया है। इस मामले की मरीज के परिजनों ने सीएम हेल्पलाइन में शिकायत दर्ज कराई तो जवाब आया कि हम प्राइवेट अस्पताल की शिकायत दर्ज नहीं करते हैं। अस्पताल प्रबंधन ने बिल पूरा जमा करने के बाद ही डिस्चार्ज करने की बात कही है।
दिलीप कनाडे़ 7 अक्टूबर को अपोलो सेज में दिखने पहुंचे। वहां उन्होंने डॉक्टर जस्टिन थॉमस को अपनी समस्या बताई। डा. थॉमस ने कहा कि उनकी आंखों में इंफेक्शन हो गया है और आॅपरेशन कराना जरूरी है। मरीज के परिजनों ने उन्हें 7 अक्टूबर को भर्ती कर दिया। 9 अक्टूबर को उनकी सर्जरी हुई। इस बीच आर्थिक सहायता के लिए मुख्यमंत्री राहत के लिए 7 लाख रुपए का एस्टीमेट भी बनवाकर अस्पताल ने दिया। वहां से 75 हजार की आर्थिक मदद हुई। शुरूआत में एस्टीमेट साढ़े 5 लाख रुपए का बनाया गया था। इस बीच 75 हजार रुपए मिलने के बाद 3 लाख से अधिक का बिल भी जमा कर दिया। डिस्चार्ज करने की बारी आई तो 16 अक्टूबर को उन्होंने कहा कि साढे़ 11 लाख का बिल हो गया है। जब तक बिल का पूरा भुगतान नहीं किया जाता है मरीज को अस्पताल में ही रहना होगा। मामले में पहले तो अस्पताल ने मरीज को धोखे में रखा गया। बाद में इलाज करते-करते साढ़े 11 लाख रुपए का बिल थमा दिया।
सीएमएचओ तक पहुंची शिकायत, नोटिस देने के बाद अस्पताल से मांगा जाएगा जवाब
- हालांकि इस मामले में भोपाल सीएमएचओ मनीष शर्मा से शिकायत की गई है। उन्होंने कहा कि इस मामले की जांच कराई जाएगी। बिल किस लिए ज्यादा लिया गया है। इस पर भी अस्पताल प्रबंधन को नोटिस देकर जवाब मांगा जाएगा। फिलहाल मरीज के परिजन घंटों तक अस्पताल में परेशान होते रहे लेकिन किसी ने भी सुनवाई नहीं की। अस्पताल प्रबंधन में स्पष्ट कह दिया कि जब तक पूरा बिल नहीं भुगतान किया था। तब तक मरीज को डिस्चार्ज नहीं किया जाएगा और उसे अस्पताल के भीतर ही रखा जाएगा।
इधर, डाॅक्टर ने नहीं दी प्रतिक्रिया
- मरीज के इलाज के संबंध में डाॅ. जस्टिम थामस से संपर्क करने की कोशिश की गई है लेकिन उनकी तरफ से कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है। हालांकि अपोलो सेज के खिलाफ पहले भी कई ऐसे मामले सामने आए हैं लेकिन प्रशासन या फिर स्वास्थ्य विभाग ने कोई एक्शन नहीं लिया है।

