होम्योपैथी शोध में मध्य प्रदेश को अंतरराष्ट्रीय पहचान, डॉ. ए.के. द्विवेदी बने जर्नल के संपादकीय मंडल के सदस्य
इंटरनेशनल जर्नल ऑफ होम्योपैथिक केस रिपोर्ट्स में 2026 से 2031 तक मिली जिम्मेदारी
एवीएस न्यूज.भोपाल
होम्योपैथी चिकित्सा और शोध के क्षेत्र में मध्य प्रदेश के प्रो. (डॉ.) अश्विनी कुमार द्विवेदी को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई जिम्मेदारी मिली है। उन्हेंइंटरनेशनल जर्नल ऑफ होम्योपैथिक केस रिपोर्ट्स में 2026 से 2031 तक मिली जिम्मेदारी (आईजेएचसीआर) के संपादकीय मंडल में वर्ष 2026 से 2031 तक के लिए सदस्य नियुक्त किया गया है।
डॉ. द्विवेदी वर्ष 2015 से केंद्रीय होम्योपैथी अनुसंधान परिषद, आयुष मंत्रालय, भारत सरकार से जुड़े हुए हैं। इस दौरान वे होम्योपैथी से संबंधित शोध और अकादमिक गतिविधियों से जुड़े रहे हैं। जर्नल के संपादकीय मंडल में उनकी नियुक्ति उनके अकादमिक और शोध कार्यों के आधार पर की गई है।
नई जिम्मेदारी के तहत वे शोध-पत्रों, समीक्षा लेखों और रोग-प्रकरण रिपोर्टों के मूल्यांकन सहित शोध से जुड़ी विभिन्न गतिविधियों में योगदान देंगे। इसके साथ ही चिकित्सकों और विद्यार्थियों को शोध कार्य के लिए प्रोत्साहित करने की भूमिका भी निभाएंगे।
प्रदेश के चिकित्सकों और छात्रों को मिलेगा मंच
डॉ. द्विवेदी ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय जर्नल के संपादकीय मंडल में जिम्मेदारी मिलना व्यक्तिगत उपलब्धि के साथ मध्य प्रदेश में होम्योपैथी के शोध और अकादमिक गतिविधियों के लिए भी महत्वपूर्ण है। उनके अनुसार इससे प्रदेश के होम्योपैथी संस्थानों से जुड़े चिकित्सकों, शिक्षकों और विद्यार्थियों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर शोध से जुड़ने तथा अपने कार्य को व्यापक मंच तक पहुंचाने के अवसर मिल सकते हैं।
एनीमिया जागरूकता अभियान भी जारी
डॉ. द्विवेदी की ओर से चलाए जा रहे एनीमिया जागरूकता अभियान को प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों में संचालित किया जा रहा है। अभियान के तहत एनीमिया, पोषण, संतुलित आहार और स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है।
अभियान को लेकर प्रदेश के अन्य जिलों में भी जागरूकता कार्यक्रम आयोजित करने के सुझाव सामने आए हैं। आयोजकों के अनुसार, इसका उद्देश्य एनीमिया से जुड़े स्वास्थ्य संबंधी विषयों को लेकर लोगों में जागरूकता बढ़ाना है।
डॉ. द्विवेदी की शोध, चिकित्सा शिक्षा और जनजागरूकता से जुड़ी गतिविधियों को प्रदेश में होम्योपैथी के अकादमिक और शोध कार्यों को बढ़ावा देने वाली पहल के रूप में देखा जा रहा है।


