ई-कॉमर्स कंपनियों द्वारा ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर कीटनाशक बेचने का विरोध
व्यापारिक संठनों के प्रतिनिधियों ने किाक ई-कॉमर्स के लिए बनें कड़े कानून
एवीएस न्यूज..भोपाल
कीटनाशक बनाने वाली 17 बड़ी कंपनियां ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर व्यापारियों एवं किसानों को कीटनाशक बेचने का व्यापार कर रही है जो वह पूर्ण रूप से अवैध है क्योंकि किसी भी ई-कॉमर्स कंपनी के पास किसी भी निर्माता कंपनी का प्रिंसिपल सर्टिफिकेट उपलब्ध नहीं है ।

आल इंडिया एग्रो इनपुट डीलर एसोसिएशन नई दिल्ली के उपाध्यक्ष मानसिंह राजपूत और राष्ट्रीय प्रवक्ता संजय कुमार रघुवंशी ने ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर कीटनाशक बेचने वाली कंपनियों के खिलाफ कड़े कानून बनाने की मांग की है ताकि घटिया या नकली उत्पादों से किसानों को संभावित नुकसान की स्थिति में जवाबदेही तय की जा सके।
मध्यप्रदेश कृषि आदान विक्रेता संघ के प्रदेश अध्यक्ष मानसिंह राजपूत ने कहा कि मौजूदा समय में कीटनाशकों का विनियमन इनसेक्टिसाइड्स एक्ट, 1968 के तहत होता है। सरकार ने साल 2022 में इसमें संशोधन कर ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर आम उत्पादों की तरह कीटनाशकों की बिक्री के लिए भी अनुमति प्रदान की थी। अब सरकार पेस्टिसाइड मैनेजमेंट विधेयक लाने की तैयारी कर रही है । कीटनाशक अधिनियम 1968 की धारा 10 (4 ) के अनुसार कीटनाशक बेचने वाले प्रत्येक व्यापारी के पास प्रत्येक निर्माता कंपनी का प्रिंसिपल सर्टिफिकेट उसे सप्लाई करने वाले निर्माता कंपनी के अधिकृत डीलर के नाम के साथ जुड़वाना अनिवार्य है तभी कोई भी व्यापारी किसी कंपनी का उत्पादन बेच सकता है । लेकिन वह सिर्फ मार्केट से किसी भी व्यक्ति से कोई भी कीटनाशक खरीद कर किसानों एवं व्यापारियों को बेच रहे हैं जो की पूर्ण रूप से अवैध है ।
अतः इस पर पूर्ण रूप से रोक लगनी चाहिए
प्रदेश अध्यक्ष मानसिंह राजपूत ने बताया कि ई-कॉमर्स कंपनियों से कई बड़ी कंपनियों के उत्पाद जो किसानों के घर तक सीधे पहुंच रहे हैं वह कई बार नकली साबित हो चुके हैं लेकिन ई-कॉमर्स कंपनी से खरीदे जाने के कारण किसानों की शिकायत पर कोई किसी भी उपसंचालक कृषि ने पिछले सालों में कभी भी, कोई भी कार्यवाही नहीं की है क्योंकि उप संचालक कृषि का कार्य क्षेत्र सिर्फ उसका जिला होता है। यदि जिले के बाहर से कोई उत्पाद जिले में आकर फसलों को नुकसान पहुंचा ता है या काम नहीं करता है तो

