प्लैटिनमआरएक्स ने 10 लाख उपयोगकर्ताओं का आंकड़ा पार किया, मरीजों को ₹128 करोड़ से अधिक की बचत
एवीएस न्यूज.इंदौर
किफायती ब्रांडेड-जेनेरिक दवाओं के लिए भारत के प्रमुख प्लेटफॉर्म प्लैटिनमआरएक्स ने एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल करते हुए 10 लाख से अधिक उपयोगकर्ताओं का आंकड़ा पार कर लिया है। कंपनी के अनुसार, अब तक इस प्लेटफॉर्म के जरिए देशभर के मरीजों को 128 करोड़ से अधिक की बचत हुई है।
डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर और हृदय रोग जैसी दीर्घकालिक बीमारियों से जूझ रहे मरीजों के लिए दवाओं पर हर महीने 2,000 से 5,000 रुपए तक का खर्च आम बात है, जो कई बार आर्थिक बोझ बन जाता है। ऐसे में कई मरीज दवाओं की खुराक बीच में छोड़ने को मजबूर हो जाते हैं। इसी समस्या के समाधान के उद्देश्य से प्लैटिनमआरएक्स को विकसित किया गया है।
प्लैटिनमआरएक्स के को-फाउंडर आशुतोष पांडे ने कहा कि मरीजों द्वारा बचाए गए 128 करोड़ केवल एक व्यावसायिक आंकड़ा नहीं हैं, बल्कि यह उन परिवारों की वास्तविक राहत है, जिन्होंने इस राशि का उपयोग बच्चों की शिक्षा, घर के खर्च और दैनिक जरूरतों में किया है। उन्होंने कहा कि कंपनी का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि गुणवत्तापूर्ण दवाएं हर व्यक्ति की पहुंच में हों।
प्लेटफॉर्म प्रत्येक दवा के लिए उच्च गुणवत्ता वाले ब्रांडेड जेनेरिक विकल्प उपलब्ध कराता है, जिन्हें प्रतिष्ठित फार्मा कंपनियों से प्राप्त किया जाता है। इन दवाओं का सक्रिय घटक (सॉल्ट कंपोजिशन) मूल ब्रांडेड दवाओं के समान होता है। सभी दवाएं लाइसेंस प्राप्त फार्मासिस्ट द्वारा वितरित की जाती हैं और देश के 20,000 से अधिक पिन कोड्स में उपलब्ध हैं।
कंपनी के अनुसार, महानगरों में एक दिन के भीतर और अन्य स्थानों पर 1 से 3 दिनों में डिलीवरी की सुविधा दी जा रही है। प्लेटफॉर्म के माध्यम से मरीजों को दवा खर्च में लगभग 50–60 प्रतिशत तक की बचत हो रही है।
प्लैटिनमआरएक्स की स्थापना आशुतोष पांडे (आईआईटी दिल्ली के पूर्व छात्र) और पीयूष कुमार (आईआईएम कोलकाता के पूर्व छात्र) ने की थी। कंपनी का मानना है कि भारत में स्वास्थ्य सेवा की चुनौती केवल सप्लाई की नहीं, बल्कि भरोसे और पहुंच की भी है।
हाल के वर्षों में ब्रांडेड जेनेरिक दवाओं को अपनाने की दर में भी तेजी देखी गई है, जो 2024 में 22 प्रतिशत से बढ़कर 2025 में 40 प्रतिशत हो गई है और 2026 के अंत तक इसके 70 प्रतिशत से अधिक होने का अनुमान है। कंपनी का कहना है कि यह बदलाव दर्शाता है कि मरीज अब किफायती और विश्वसनीय विकल्पों की ओर तेजी से बढ़ रहे हैं।






