एवीएस न्यूज.मुंबई 


भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) के पश्चिमी क्षेत्र के अध्यक्ष वीर एस. आडवाणी ने उद्योग जगत, सरकार और समाज से मिलकर सतत एवं जिम्मेदार आर्थिक विकास को बढ़ावा देने का आह्वान किया।

उन्होंने कहा कि आने वाले समय में स्थिरता (सस्टेनेबिलिटी) केवल पर्यावरणीय आवश्यकता नहीं, बल्कि व्यावसायिक प्रतिस्पर्धा और दीर्घकालिक सफलता का प्रमुख आधार बनने जा रही है।


भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) के पश्चिमी क्षेत्र के अध्यक्ष वीर आडवाणी ने विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर कहा कि पश्चिमी भारत देश की आर्थिक प्रगति का प्रमुख केंद्र बन चुका है और अब उसे संसाधन-कुशल तथा पर्यावरण के प्रति जिम्मेदार विकास के अगले चरण में भी नेतृत्व करना होगा।

उन्होंने कहा कि विकास, प्रतिस्पर्धा और स्थिरता अब अलग-अलग विषय नहीं रह गए हैं। भविष्य में वही व्यवसाय सफल होंगे जो संसाधनों का जिम्मेदारीपूर्वक प्रबंधन करते हुए आर्थिक मूल्य का सृजन करने में सक्षम होंगे।

 आडवाणी ने बताया कि पश्चिमी भारत के उद्योग नवीकरणीय ऊर्जा, स्वच्छ प्रौद्योगिकियों और संसाधन दक्षता में तेजी से निवेश कर रहे हैं। यह इस बात का संकेत है कि उद्योग जगत अब स्थिरता को केवल सामाजिक जिम्मेदारी नहीं, बल्कि व्यवसायिक लचीलापन और भविष्य की तैयारी का महत्वपूर्ण हिस्सा मान रहा है।


 ‘विकसित भारत 2047’ का लक्ष्य प्रत्येक व्यवसाय का हिस्सा बने 
उन्होंने जलवायु परिवर्तन से निपटने, हरित भवनों को बढ़ावा देने, सतत विनिर्माण और कम कार्बन उत्सर्जन वाले विकास मॉडल को प्रोत्साहित करने के लिए सीआईआई की विभिन्न पहलों का भी उल्लेख किया।

उन्होंने कहा कि सीआईआई-सेंटर ऑफ एक्सीलेंस फॉर सस्टेनेबल डेवलपमेंट (सीआईआई-सीईएसडी) तथा इंडियन ग्रीन बिल्डिंग काउंसिल (आईजीबीसी)के माध्यम से संगठन देशभर में पर्यावरण-अनुकूल विकास को गति देने के लिए लगातार कार्य कर रहा है।

वीर आडवाणी ने कहा कि ‘विकसित भारत 2047’ का लक्ष्य केवल आर्थिक वृद्धि से हासिल नहीं होगा, बल्कि जिम्मेदारीपूर्ण और समावेशी विकास से ही इसे साकार किया जा सकेगा। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि सस्टेनेबिलिटी को प्रत्येक व्यवसाय की प्राथमिक रणनीति का हिस्सा बनाया जाना चाहिए।


अपने संदेश के अंत में उन्होंने पर्यावरणीय चुनौतियों से प्रभावी ढंग से निपटने और दीर्घकालिक आर्थिक समृद्धि सुनिश्चित करने के लिए उद्योग, सरकार और समाज के बीच मजबूत साझेदारी की आवश्यकता बताई। उन्होंने कहा, “प्रकृति हमें सहारा देती है, अब समय आ गया है कि हम भी प्रकृति को सहारा दें।