एवीएस न्यूज..नई दिल्ली


भारत की डिजिटल प्रेशियस मेटल्स इंडस्ट्री ने साथ मिलकर डिजिटल प्रेशियस मेटल्स एश्योरेंस काउंसिल ऑफ इंडिया (DPMACI) का गठन किया है। यह एक सेल्फ-रेगुलेटरी ऑर्गनाइजेशन (SRO) है, जिसका उद्देश्य भारत के डिजिटल मेटल इकोसिस्टम में पारदर्शिता, संचालन की विश्वसनीयता और कंज्यूमर प्रोटेक्शन सुनिश्चित करना है।


डिजिटल प्रेशियस मेटल इंडस्ट्री को एक नया आयाम देने के लिए, सार्वजनिक नीति की विशेषज्ञ सुश्री निरुपमा सुंदरराजन को DPMACI का स्वतंत्र चेयरपर्सन नियुक्त किया गया है। उनके नेतृत्व में, यह ऑर्गनाइजेशन न केवल सख्त नियम लागू करेगा, बल्कि सरकार के साथ मिलकर एक पारदर्शी और कंज्यूमर-फ्रेंडली इकोसिस्टम भी तैयार करेगा। इस कदम से न सिर्फ कंज्यूमर्स का भरोसा बढ़ेगा, बल्कि यह इंडस्ट्री को टेक्नोलॉजी और इनोवेशन के साथ आगे बढ़ाने में मदद करेगा।
 यह ऑर्गनाइजेशन, प्रमुख विक्रेताओं और वितरकों को एकीकृत आचार संहिता के अंतर्गत संगठित करता है।

इस पहल का मुख्य उद्देश्य, इंडस्ट्री में सख्त मानकों और सत्यापन तंत्र को लागू करना है, जिससे कंज्यूमर्स का विश्वास बढ़े और उनकी चिंताओं का प्रभावी समाधान किया जा सके। 
डिजिटल प्रेशियस मेटल्स एश्योरेंस काउंसिल ऑफ इंडिया (DPMACI) के वर्तमान सदस्य, भारत में डिजिटल गोल्ड और सिल्वर के प्रमुख विक्रेता और वितरक हैं। जिनमें MMTC-PAMP, सेफ़गोल्ड, ऑगमोंट, फोनपे, भारतपे, मोबिक्विक, गुल्लक, लेनदेन क्लब और क्रेड शामिल हैं। इंडस्ट्री में उच्चतम मानकों का पालन सुनिश्चित करने के लिए, DPMACI फ्रेमवर्क, 1:1 भौतिक धातु समर्थन की गारंटी देता है, जिसे नियमित ऑडिट के माध्यम से सत्यापित किया जाएगा। इसके अलावा, सभी होल्डिंग्स का लंदन/UAE/ भारतीय गुड डिलीवरी मानकों के अनुरूप होना अनिवार्य होगा।

यह ऑर्गनाइजेशन, कंज्यूमर्स के अधिकारों की रक्षा के लिए एक ओम्बड्समैन फ्रेमवर्क की स्थापना पर भी कार्य करेगा, जिससे उनकी शिकायतों का निवारण, निर्धारित समय सीमा के भीतर सुनिश्चित किया जा सके।

DPMACI फ्रेमवर्क को डिजिटल प्रेशियस मेटल्स के क्षेत्र में पारदर्शिता और सुरक्षा बनाए रखने के लिए बनाया गया है।

इस फ्रेमवर्क के अंतर्गत, स्वतंत्र ऑडिट फर्में सख्त जाँच करेंगी, ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि भौतिक भंडार  कंज्यूमर होल्डिंग्स से पूरी तरह मेल खाते हों। सभी संपत्तियों को स्वतंत्र संरक्षकों या सुरक्षित वॉल्ट्स में रखा जाएगा, जहाँ स्टोरेज, सुरक्षा, इंश्योरेंस और प्रकटीकरण के लिए सख्त नियम लागू होंगे। कंज्यूमर फंड्स को स्वतंत्र ट्रस्टी की देखरेख में अलग-अलग अकाउंट्स में रखा जाएगा, ताकि ग्राहकों के हित पूरी तरह सुरक्षित रहें। यह व्यवस्था यह भी सुनिश्चित करती है कि यदि किसी मध्यस्थ को दिवालिया घोषित कर दिया जाए, तब भी कंज्यूमर एसेट्स पूरी तरह से सुरक्षित रहे। 


इसके लिए, एक आधिकारिक पोर्टल लॉन्च किया गया है जिसमें शासन मानकों और एक सुव्यवस्थित शिकायत निवारण तंत्र के डिटेल्स दिए हैं। यह पहल भारत के तेजी से बढ़ते डिजिटल मेटल मार्केट को वैश्विक स्तर की सर्वोत्तम प्रथाओं के साथ जोड़ती है। यह पोर्टल अनिश्चितता को खत्म करके सत्यापित प्रमाणपत्रों और सक्रिय अनुपालन समीक्षाओं के माध्यम से पारदर्शिता और विश्वास को बढ़ावा देता है। 


इस पहल पर बात करते हुए, DPMACI की स्वतंत्र चेयरपर्सन, सुश्री निरुपमा सुंदरराजन जी ने कहा, “DPMACI का गठन इस इंडस्ट्री के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है। पारदर्शिता और कठोर मानकों के एक साझा ढाँचें को सक्रिय रूप से स्थापित करके, हम सतत विकास की नींव रख रहे हैं जो ग्राहकों के विश्वास को प्राथमिकता देता है।

स्वतंत्र ऑडिट और स्पष्ट सुरक्षा उपायों जैसे अभ्यासों को संस्थागत बनाना पूरे सेक्टर के लिए अच्छा है, क्योंकि यह कंज्यूमर्स की सुरक्षा और बाजार की विश्वसनीयता को मज़बूत करता है। DPMACI नीति निर्माताओं के साथ एक रचनात्मक भागीदार के रूप में काम करने के लिए प्रतिबद्ध है, ताकि ये बेहतरीन प्रथाएँ पूरे इकोसिस्टम के लिए एक मानक बन सकें और एक पारदर्शी व फलती-फूलती डिजिटल इकोनॉमी को सहारा दे सकें।” 
जैसे-जैसे भारत में डिजिटल मेटल का उपयोग तेजी से बढ़ रहा है, यह पहल घरेलू बाजार को स्थापित वैश्विक ढाँचों के साथ जोड़ती है। यह उद्योग-व्यापी मानकों और संरचित सत्यापन तंत्रों की स्थापना के माध्यम से संभव हो रहा है।