बजट आयुर्वेद, योग, मेडिटेशन और वेलनेस सेक्टर को प्रोत्साहित करना भारत की सांस्कृतिक और आर्थिक शक्ति को बढ़ाएगा
एवीएस न्यूज.भोपाल
केंद्रीय बजट में मध्यम वर्ग और व्यापारियों को दरकिनार किया गया है। व्यापारी और कारोबारी इनकम टैक्स में छूट की उम्मीद लगाए थे लेकिन निराशा हाथ लगी। कॉरपोरेट घरानों को बढ़ावा दिया गया है, इसमें छोटे व्यापारियों को ध्यान नहीं दिया गया। बजट में एक अच्छा फैसला लिया गया है कि पर्यटन स्थलों को बढ़ावा देने की बात कही गई है, इससे रोजगार का अवसर बढे़गा।
बजट अच्छा रहा, वैसे व्यापारियों को कोई पूछने वाला नहीं है फिर भी उनके लिए भी बेहतर है। इस बजट से महंगाई से कुछ राहत मिलने की उम्मीद है। डिजिटल व ऑनलाइन मार्केट व्यापारियों की कमर तोड़ रही है।
कारोबारियों ने कहाकि आम बजट में व्यापारियों और उद्यमियों को कोई खास लाभ नहीं प्राप्त हुआ है। केवल महिलाओं को उद्यमी बनाने पर जोर दिया गया है। शुगर और कैंसर की दवाएं सस्ती की गई है। सीएनजी और बायोगैस को सस्ती की गई है। इससे कुछ राहत मिलने की उम्मीद है।

व्यवसायी आरके बामोरिया और अनुपम अग्रवाल ने कहाकि सरकार ने टैक्स स्लैब में कोई बदलाव नहीं किया है। पिछली बार की ही तरह इस बार भी सालाना कमाई 4 लाख रुपए तक ही है। वहीं 4 से 8 लाख रुपए तक की कमाई पर सिर्फ 5 फीसदी टैक्स लगेगा। कारोबारियों ने कहाकि एमएसएमई सेक्टर पहले से ही कई मुश्किलों से गुजर रहा है। महंगाई, कच्चे माल की बढ़ती कीमतें और बाजार में कड़ी प्रतिस्पर्धा छोटे उद्योगों के लिए बड़ी चुनौती बनी हुई है। ऐसे में बजट से उन्हें टैक्स में राहत, सस्ता लोन और सरल नीतियों की उम्मीद थी, जो पूरी नहीं हुई।

उद्योगपति योगेश गोयल ने कहा कि यह बजट आम उद्यमियों के लिए निराशा जनक है। एमएसएमई के लिए कोई ठोस घोषणा नहीं की गई। सरकार बार-बार एमएसएमई को देश की रीढ़ बताती है, लेकिन बजट में इसका असर नजर नहीं आता।

भोपाल चेंबर ऑफ कॉमर्स के पूर्व अध्यक्ष तेजकुलपाल सिंह पाली कहाकि छोटे उद्योगों के लिए इस बजट में कुछ भी नया नहीं है। छोटे उद्यमी लगातार दबाव में हैं, लेकिन सरकार की ओर से उन्हें सहारा देने के लिए कोई मजबूत कदम नहीं उठाया गया।

कारोबारी ईश्वरदास संगतानी ने आशंका जताई कि अगर इसी तरह सिर्फ बड़े उद्योगों को प्राथमिकता दी जाती रही, तो आने वाले समय में देश में केवल बड़ी-बड़ी कंपनियां ही रह जाएंगी। एमएसएमई सिर्फ एक ट्रेंड बनकर सीमित हो जाएंगे, जिसका सीधा असर रोजगार और स्थानीय अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा। यह बजट एमएसएमई सेक्टर के लिए नई उम्मीद नहीं जगा सका। सरकार को चाहिए कि वह छोटे और मध्यम उद्योगों की समस्याओं को गंभीरता से समझे और आने वाले समय में उनके लिए ठोस और प्रभावी कदम उठाए।

भारत 2047 में कैसा होगा या होना चाहिए इस पर फोकस किया
आज का बजट को मैं एक भारत सरकार का विजन डॉक्यूमेंट के रूप में देख रहा हूं जिसमे भारत 2047 में कैसा होगा या होना चाहिए इस पर फोकस किया गया। वित्त मंत्री ने भारत के नागरिकों को बजट केवल स्वयं के परिपेक्ष में देखने की जगह भारत कैसा भविष्य में हो यह समझाने की कोशिश की हैं। समग्र विकसित भारत में आप क्या आहुति दे सकते है, इस पर ध्यान देने की आवयश्कता पर जोर दिया है। लघु उद्योग और व्यापार के लिए एक बड़ा बाज़ार तैयार करने के लिए सरकार क्या क़दम उठा रही है उस पर ध्यान दिलाया है जबकि उसने स्वयं को किस किस विषयों पर काम करना है उस पर चर्चा की है।
मनोज मोदी
सह अध्यक्ष, पीएचडीसीसीआई (मध्य प्रदेश), भोपाल
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क्रेडाई ने किया सरकार द्वारा अवसंरचना पर निरंतर खर्च को प्रोत्साहित करने का स्वागत : विपिन
भोपाल। क्रेडाई ने सरकार द्वारा अवसंरचना पर निरंतर खर्च को प्रोत्साहित करने का स्वागत किया है। जो रियल एस्टेट क्षेत्र के लिए एक बड़ा सकारात्मक कदम है। राजमार्गों, मेट्रो, लॉजिस्टिक्स कॉरिडोर, रेलवे और शहरी अवसंरचना में निवेश से कनेक्टिविटी में सुधार होगा, विकास के नए रास्ते खुलेंगे और दीर्घकालिक शहरी विकास को समर्थन मिलेगा। यह बात क्रेडाई के पूर्व अध्यक्ष विपिन गोयल ने कही। गोयल ने कहाकि क्रेडाई ने व्यापार करने में आसानी पर दिए गए जोर की भी सराहना करता है। त्वरित अनुमोदन, सरलीकृत प्रक्रियाएं और अधिक डिजिटलीकरण से परियोजना की समयसीमा और लागत में उल्लेखनीय कमी आ सकती है, जिससे अंततः डेवलपर्स और घर खरीदारों दोनों को लाभ होगा।
किफायती आवास के लिए बजट में कोई ठोस प्रस्ताव न होने से क्रेडाई बेहद निराश
उन्होंने कहाकि हालांकि, किफायती आवास के लिए बजट में कोई ठोस प्रस्ताव न होने से क्रेडाई बेहद निराश है। किफायती आवास की मौजूदा पुरानी परिभाषा के चलते क्रेडाई का अनुमान है कि कुल आवास आपूर्ति में इस क्षेत्र की हिस्सेदारी 18 फीदी से घटकर लगभग 12 फीसदी तक हो सकती है। यह भारत के निम्न मध्यम वर्ग और मध्यम वर्ग के लिए एक गंभीर चेतावनी है। क्रेडाई का मानना है कि किफायती आवास कोई कल्याणकारी योजना नहीं है, बल्कि यह आर्थिक बुनियादी ढांचा है। यह रोजगार, उपभोग और सामाजिक स्थिरता का एक प्रमुख चालक है। निर्माण लागत और जमीन की बढ़ती कीमतों में उचित नीतिगत समर्थन की कमी के कारण विकासकर्ता इस क्षेत्र से दूर होते जा रहे हैं। यदि किफायती आवास की आपूर्ति कमजोर होती रही, तो इसके परिणाम स्पष्ट होंगे। किराया बढ़ेगा, आवागमन का समय बढ़ेगा और अनौपचारिक आवासों की संख्या में वृद्धि होगी। क्रेडाई सरकार से आग्रह करता है कि समावेशी और टिकाऊ शहरी विकास सुनिश्चित करने के लिए किफायती आवास पर तत्काल नीतिगत ध्यान दिया जाए।

आम से लेकर खास तक के लिए कुछ न कुछ तोहफा मिला
बहुत ही सधा हुआ बजट है जिसमें आम से लेकर खास तक के लिए कुछ न कुछ तोहफा मिला। बुजुर्गों के कैंसर और मधुमेह की दवाई सस्ती होंगी। युवाओं को एमएसएमई के माध्यम से न्याय उद्योग खोलने में सहायता, बायो सीएनजी पर टैक्स में राहत का फायदा किसानों को होगा। घरेलू उद्योग के लिए , ग्रामीण महिलाओं के लिए शी मार्ट योजना कुल मिलाकर 2026/27 के बजट में सब के लिए कुछ न कुछ मिला।
अजय सिंह
अध्यक्ष,मध्यप्रदेश पेट्रोल पंप ऑनर्स एसोसिएशन

व्यापारियों को सीमित राहत, प्रमुख अपेक्षाएं अधूरी
बजट में एमएसएमई सेक्टर के लिए ऋण सुविधा बढ़ाने और इंफ्रास्ट्रक्चर पर निवेश की घोषणा सकारात्मक कदम है, जिससे व्यापारिक गतिविधियों को कुछ गति मिल सकती है। लॉजिस्टिक्स, शहरी बुनियादी ढांचे और ट्रांसपोर्ट से जुड़े प्रावधानों से भोपाल जैसे शहरों में व्यापार और रोजगार के अवसर बढ़ने की संभावना है। हालांकि व्यापारियों की प्रमुख मांग जीएसटी प्रक्रिया के वास्तविक सरलीकरण, अनावश्यक नोटिसों और दंडात्मक कार्रवाई से राहत को लेकर थी, लेकिन बजट में इस दिशा में कोई ठोस घोषणा नहीं की गई। ऑनलाइन और ऑफलाइन व्यापार के लिए समान नियमों के अभाव में स्थानीय व्यापारी लगातार प्रभावित हो रहे हैं। स्वदेशी उत्पादों और स्थानीय व्यापार को बढ़ावा देने के लिए अलग प्रोत्साहन नीति और विशेष पैकेज की कमी को भी उन्होंने निराशाजनक बताया।
धर्मेंद्र शर्मा
जिला अध्यक्ष कैट, भोपाल
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औद्योगिक विकास को गति मिलेगी, ग्लोबल चैंपियन बनाने पर दिया बल
भारत की अर्थव्यवस्था में एमएसएमई का बड़ा योगदान है, जो देश के जीडीपी में लगभग 30 फीसदी हैं। यह देश के कुल उत्पादन का लगभग एक तिहाई है। ये न केवल विनिर्माण (45 फीसदी उत्पादन) और निर्यात (40 फीसदी) में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, बल्कि 110 मिलियन से अधिक लोगों को रोजगार भी देता है। सरकार भी आत्मनिर्भर भारत और 10 हजार करोड़ के एमएसएमई ग्रोथ फंड जैसी पहल के साथ इस क्षेत्र को ग्लोबल चैंपियन बनाने पर बल दिया गया है। पांच इंडस्ट्रियल सेक्टर के लिए 20 हजार करोड़, बायोफार्मा एवं कंटेनर विनिर्माण के लिए 10 हजार करोड़ तथा इलेक्ट्रॉनिक इक्विपमेंट के लिए 40 हजार करोड़ के प्रस्ताव सराहनीय है इससे औद्योगिक विकास को गति मिलेगी।
सुनील जैन 501
अध्यक्ष, मध्यप्रदेश एफएमसीजी डिस्ट्रीब्यूटर्स एसो.

मध्यवर्ग की क्रय शक्ति बढ़ाने के कोई उपाय नहीं
केंद्र सरकार के बजट में मध्यम वर्ग के लिए कोई विशेष योजना की घोषणा नहीं की गई। सरकार ने मध्यवर्ग की क्रय शक्ति बढ़ाने के कोई उपाय नहीं किया। सरकार इस बजट में करदाता व्यापारियों के लिए किसी सोशल सिक्योरिटी योजना की घोषणा करेगी ऐसी उम्मीद थीं यह भी अपेक्षा पूरी नहीं हुई साथ ही टैक्स स्लैब में बदलाव न होने से भी कोई अतिरिक्त राहत नहीं मिली।
नवनीत अग्रवाल
प्रदेश महामंत्री, अखिल भारतीय उद्योग व्यापार मंडल

ज्वेलरी इंडस्ट्री को बजट में कोई प्रत्यक्ष राहत नहीं: संजीव गर्ग
केंद्रीय बजट 2026 में ज्वेलरी इंडस्ट्री सेक्टर को कोई विशेष या प्रत्यक्ष राहत पैकेज घोषित नहीं किया गया, जिससे इस क्षेत्र के व्यापारी, कारीगर एवं एमएसएमई इकाइयों में निराशा है। यह बात होलसेल सराफा अध्यक्ष एवं मध्य प्रदेश प्रांतीय सराफा एसोसिएशन के कोषाध्यक्ष संजीव कुमार गर्ग गांधी ने कहाकि यह उद्योग रोजगार सृजन, निर्यात और कर-राजस्व में महत्वपूर्ण योगदान देता है, फिर भी अपेक्षित समर्थन नहीं मिल पाया।
उन्होंने बताया कि बजट में सरकार का फोकस आर्थिक विकास, मैन्युफैक्चरिंग, स्टार्ट-अप, कृषि, हस्तशिल्प, कुटीर उद्योग और आत्मनिर्भर भारत पर स्पष्ट रूप से दिखाई देता है। यह दिशा दीर्घकालीन विकास के लिए सकारात्मक है। आयुर्वेद, योग, मेडिटेशन और वेलनेस सेक्टर को प्रोत्साहित करना भारत की सांस्कृतिक और आर्थिक शक्ति को बढ़ाएगा। रिसर्च सेंटर्स की स्थापना से युवाओं को नई दिशा और कौशल मिल सकता है। बजट का उद्देश्य यह होना चाहिए कि गरीब, लोअर क्लास और वंचित वर्ग को फ्री स्कीम पर निर्भर बनाने की बजाय स्थायी रोजगार और स्किल आधारित अवसर दिए जाएं। इसके अलावा इनकम टैक्स स्लैब पर चर्चा अभी भी लंबित है। उन्होंने कहाकि देश के मध्यम वर्ग, व्यापारी और नौकरीपेशा वर्ग को उम्मीद है कि वित्त मंत्री श्रीमती निर्मला सीतारमण से आयकर स्लैब में राहत देने चाहिए। ज्वेलरी इंडस्ट्री के लिए राहत पैकेज की अपेक्षा थी जो नहीं मिली। कुल मिलाकर बजट की दिशा सकारात्मक है,लेकिन ज्वेलरी इंडस्ट्री, मध्यम वर्ग और रोजगार सृजन पर और ठोस कदम उठाए जाने की आवश्यकता है।

