भोपाल। मध्यप्रदेश कृषि विपणन (मंडी) बोर्ड के प्रबंध संचालक पुरषोत्तम कुमार की कार्यशैली से मंडी बोर्ड के ही तकनीकी अधिकारियों में आक्रोश व्याप्त है। इस संबंध में संयुक्त संघर्ष मोर्चा मध्यप्रदेश मंडी बोर्ड भोपाल के संयोजक बीवी.फौजदार ने मोर्चा की और से एक ज्ञापन भी सौंपा और मांग की एमडी के चहेते अधिकारी जिन्हें वे प्रतिनियुक्ति पर मंडी मुख्यालय लेकर आए हैं उन्हें मंडी बोर्ड से तत्काल से हटाया जाए। 
मंडी बोर्ड मुख्यालय के गलियारों में चर्चा का विषय बन चुकी एमडी की मनमानी के बारे में मंडी सूत्रों ने बताया कि मंडी बोर्ड के प्रबंध संचालक की कार्यशैली विवादित, मनमर्जी की है। जिससे मंडी बोर्ड के धरातल अधिकारी -कर्मचारी में ही आक्रोश है। इतना ही नहीं अब तकनीकी अधिकारी - कर्मचारियों ने भी पत्र द्वारा शासन तथा जनहित में मध्य प्रदेश कृषि विपणन मंडी बोर्ड से संबंधित विवादित कार्यशैली तथा नियमों के विरुद्ध प्रबंच संचालक द्वारा भ्रष्टाचार से जुड़े प्रकरण में पक्षपात पूर्ण कार्रवाई करते हुए मंडी बोर्ड के प्रबंध संचालक पद से हटाने की मांग शासन और प्रशासन से की है। 


- वरिष्ठ कार्यपालन यंत्रियों को नजर अंदाज कर प्रतिनियुक्ति पर लाए इजी.को अधीक्षण यंत्री बनाया
 सूत्रों के मुताबिक मंडी बोर्ड प्रबंधन संचालक के साथ पूर्व में भोपाल विकास प्राधिकरण में अधीनस्थ कार्य कर चुके संविदा कर्मचारी डॉ.निरंजन सिंह को मंडी बोर्ड में सलाहकार के पद पर नियुक्त किए जाने का मामला अभी ठंडा नहीं हुआ कि उन्होंने विकास प्राधिकरण में ही उनके साथ कार्य कर चुके लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के कार्यपालन यंत्री बोबी चौधरी जो मैकेनिक के इंजीनियर है को नियम विरुद्ध प्रतिनियुक्ति में लेकर आए और मंडी बोर्ड के वरिष्ठ कार्यपालन यंत्रियों को नजरअंदाज करते हुए उनके ऊपर अधीक्षण यंत्री के रूप में तैनात कर दिया। 


- स्वार्थों की पूर्ति के लिए चौधरी को सभी अधिकार प्रदान कर शक्तिशाली बनाया 
मध्यप्रदेश मंडी बोर्ड अधिनियम 1598 तथा मध्यप्रदेश राज्य विपणन 2000 के अनुसार कार्यपालन यंत्री तथा अधीक्षक यंत्री सिविल को ही तकनीकी एवं वित्तीय अधिकार है। बताया जा रहा है कि सर्वाधिकार प्राप्त मंडी बोर्ड के एमडी जो मंडी बोर्ड के अधिकारी-कर्मचारियों की शिकायतों की जांच भी खुद करते हैं इतना ही नहीं वे इसके खिलाड़ी बन चुके हैं। बताया जाता है कि मंडी बोर्ड में मैकेनिकल इंजीनियर की कोई जरूरत नहीं है,परंतु फिर भी स्वार्थों की पूर्ति के लिए चौधरी को सभी अधिकार प्रदान कर शक्तिशाली बनाया है।


- बोर्ड की वरिष्ठता सूची के विरुद्ध प्रभारी बनाएं 
इतना ही नहीं मंडी बोर्ड मुख्यालय में पहले आओ पहले-पहले पाओ की तर्ज पर तकनीकी कायों में भी बोर्ड की वरिष्ठता सूची के विरुद्ध प्रभारी बनाए जाने का सिलसिला जारी है। सूची में 11 नंबर में संजय सिंह सहायक यंत्री का नाम है, परंतु वरिष्ठ 10 वरिष्ठ को नजरअंदाज करते हुए सिंह को ग्वालियर चंबल संभाग के तकनीकी संभाग का प्रभारी कार्यपालन यंत्री बनाया गया है। इसी प्रकार इस सूची में 14 नंबर पर सहायक यंत्री शैलेंद्र मंडलोई को सागर तथा रीवा संभाग का तकनीकी कार्यपालन बनाया गया है जब उसके उनसे वरिष्ठ छठवें नंबर पर आरक्षित वर्ग के सहायक यंत्री प्रभाकर मोरे अपने ही कनिष्ठ के अधीन कार्य करेंगे जो बड़ी विडंबना वाली बात है।


- नियम तथा शर्तों के विपरीत बढ़ाया कार्यकाल 
जानकारी के मुताबिक सुनील कुमार पांडे राज्य परिवहन निगम के एक कर्मचारी को जबलपुर संभाग में प्रतिनियुक्ति पर संभाग की पाटन कृषि मंडी में प्रभारी सचिव के रूप में तैनात किया गया। परिवहन नियमों के मुताबिक उनके कर्मचारियों का सेवानिवृत का 58 वर्ष का नियम है। यह  नियम 2025 को समाप्त होने के बाद प्रबंध संचालक द्वारा पहले 3 महीने के बाद अब फिर 2 महीने अर्थात 31 अक्टूबर 2025 तक उनका कार्यकाल बढ़ाकर नियम तथा शर्तों के विपरीत अब पांडे को 62 वर्ष की उम्र में सेवानिवृत किए जाने के लिए कागजी कार्रवाई शुरू कर दी गई है। वहीं मंडी बोर्ड के किसी भी मंडी सचिव का कार्यकाल नहीं बढ़ाया गया।