एमेज़ॉन द्वारा स्थापित द क्लाईमेट प्लेज़ ने सी40 शहरों के सहयोग से भारत में फ्रेट हाईवे का इलेक्ट्रिफिकेशन का ब्लूप्रिंट पेश किया
एवीएस न्यूज. नई दिल्ली
एमेज़ॉन द्वारा स्थापित द क्लाईमेट प्लेज़ (टीसीपी) ने आज सी40 सिटीज़ (क्लाईमेट एक्शन पर काम करने वाले दुनिया के लगभग 100 शहरों के नेटवर्क) के सहयोग से फ्रेट ट्रांसपोर्ट को डीज़ल से जीरो एग्ज़ॉस्ट एमिशन बैटरी इलेक्ट्रिक ट्रक्स में बदलने के लिए भारत का पहला प्रमाण आधारित रोडमैप पेश किया।
नेशनल ई.वी हाईवे गाईडेंस फ्रेमवर्क में साल 2027 तक भारत के सबसे व्यस्त फ्रेट मार्गों को इलेक्ट्रिफाई करने के लिए एक चरणबद्ध प्लान की पेशकश की गई है, जिसकी शुरुआत भारी उद्योग मंत्रालय द्वारा चुने गए 20 प्राथमिक हाईवे से होगी। इसके बाद इसका विस्तार औद्योगिक केंद्रों एवं पोर्ट्स तक किया जाएगा और अंत में साल 2035 तक एक सुगम, ई.वी-रेडी नेशनल फ्रेट नेटवर्क स्थापित कर दिया जाएगा (‘‘फ्रेमवर्क’’)।
यह फ्रेमवर्क महत्वपूर्ण क्यों है
भारत में फ्रेट की मांग आने वाले सालों में काफी ज्यादा बढ़ने की उम्मीद है, जिसके कारण स्वच्छ ट्रांसपोर्ट विकल्पों की जरूरत बढ़ेगी। देश में 70 प्रतिशत वस्तुओं का ट्रांसपोर्ट सड़कों के माध्यम से ही होता है। मीडियम और हैवी-ड्यूटी ट्रक सड़क पर मौजूद वाहनों के केवल 3 प्रतिशत हैं, पर पार्टिकुलेट एमिशन में इनका योगदान 53 प्रतिशत है। साल 2050 तक इनकी मांग चार गुना से अधिक बढ़ जाएगी। ऐसे में एमिशन को कम करने और एफिशियंसी बढ़ाने के लिए इलेक्ट्रिक फ्रेट का विस्तार महत्वपूर्ण है। इस फ्रेमवर्क में इलेक्ट्रिफिकेशन और सस्टेनेबल मोबिलिटी पर सरकार के जोर के अनुरूप व्यवहारिक तरीके सुझाए गए हैं, जिससे भारत को साल 2070 तक नेट-जीरो एमिशन का लक्ष्य प्राप्त करने में मदद मिलेगी।
डॉ. ओ. पी. अग्रवाल, डिस्टिंग्विश्ड फैलो, नीति आयोग ने कहा, ‘‘स्वच्छ फ्रेट की ओर भारत के सफर के लिए सरकार और उद्योग के बीच मजबूत सहयोग की जरूरत होगी। आज लेनशिफ्ट प्रोग्राम के अंतर्गत लॉन्च किया गया ई.वी हाईवे गाईडेंस फ्रेमवर्क इस दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इससे देश में इलेक्ट्रिक ट्रकिंग के लिए एक व्यापक पाथवे बनाने में मदद मिलेगी। ई-फास्ट इंडिया प्लेटफॉर्म के माध्यम से नीति आयोग लॉजिस्टिक्स ऑपरेटरों, ओ.ई.एम, एनर्जी प्रोवाईडर्स और फाईनेंशियल इंस्टीट्यूशंस को एक साथ ला रहा है, जिससे फ्रेट के इलेक्ट्रिफिकेशन का ईकोसिस्टम स्थापित करने में मदद मिलेगी। इन प्रयासों और सी40 सिटीज़ की पार्टनरशिप के साथ क्लाईमेट प्लेज और प्राईवेट सेक्टर के हितधारक, जैसे एमेज़ॉन और अशोक लेलैंड प्रदर्शित कर रहे हैं कि सहयोगपूर्वक काम करके किस प्रकार इलेक्ट्रिक फ्रेट को पायलट से बड़े स्तर पर उपयोग तक पहुँचाया जा सकता है।
अभिनव सिंह, वी.पी, ऑपरेशंस, भारत एवं ऑस्ट्रेलिया, एमेज़ॉन ने कहा, ‘‘हम अपने ऑपरेशंस को ज्यादा सस्टेनेबल बनाने में निवेश कर रहे हैं। इसके लिए हमारे लॉजिस्टिक्स को इलेक्ट्रिफाई करना बहुत जरूरी है। क्लाईमेट प्लेज़ के माध्यम से हम अपने हितधारकों के साथ मिलकर भारत में इलेक्ट्रिक फ्रेट सॉल्यूशंस का विस्तार कर रहे हैं। इस प्रोजेक्ट के नतीजे और फ्रेमवर्क उत्साहवर्धक हैं। इनसे इलेक्ट्रिक फ्रेट को बढ़ावा देने में सरकार और उद्योग के बीच लगातार सहयोग के महत्व को बल मिलता है।’’
पायलट से पॉलिसी तक
इस फ्रेमवर्क के लिए लेनशिफ्ट पायलट प्रोजेक्ट द्वारा प्राप्त की गई जानकारी का इस्तेमाल किया गया है। यह पायलट सी40 सिटीज़ और द क्लाईमेट प्लेज़ द्वारा चलाया गया था, जिसमें ट्रक निर्माताओं, फ्लीट ऑपरेटर्स, लॉजिस्टिक्स प्रदाताओं और फाईनेंसर्स ने हिस्सा लेकर इलेक्ट्रिक फ्रेट का परीक्षण किया। इस प्रोजेक्ट के अंतर्गत, इलेक्ट्रिक ट्रक्स ने बैंगलुरु-चेन्नई कॉरिडोर पर 600 ट्रिप्स पूरी कीं। विभिन्न सेक्टरों में 200,000 किलोमीटर से अधिक दूरी तय की। परफॉर्मेंस, विश्वसनीयता और लागत पर जानकारी एकत्रित की, तथा दीर्घकालिक कॉन्ट्रैक्ट द्वारा इसे बढ़ावा दिया। स्केलेबिलिटी का आकलन करने के लिए इस प्रोजेक्ट के अंतर्गत दिल्ली, मुंबई, चेन्नई और कोलकाता को जोड़ने वाले गोल्डन क्वाड्रिलेटरल पर 6,500 किलोमीटर का पायलट चलाया गया।
लेनशिफ्ट प्रोजेक्ट में हर तरह के उपयोग के लिए इलेक्ट्रिक फ्रेट की उपयोगिता प्रदर्शित हुई, जिसके द्वारा 400 किलोमीटर प्रति दिन से अधिक की दूरी तय की जा सकती है। इस प्रोजेक्ट के दौरान इलेक्ट्रिक ट्रक के ऑर्डर्स में 4.2 गुना बढ़ोत्तरी दर्ज हुई और दीर्घकालिक कमर्शियल कॉन्ट्रैक्ट भी किए गए, जिससे इसके ऊपर बाजार का बढ़ता भरोसा प्रदर्शित होता है।
नैम केरुवाला, रीज़नल डायरेक्टर, साउथ एवं वेस्ट एशिया, सी40 सिटीज़ ने कहा, ‘‘फ्रेट को डीकार्बोनाईज़ करना कोई भविष्य का लक्ष्य नहीं है। यह देश के आर्थिक और सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए तुरंत आवश्यक है। लेनशिफ्ट ने प्रदर्शित किया है कि जीरो-एग्ज़ॉस्ट-एमिशन ट्रक लंबे हॉल के कॉरिडोर पर चल सकते हैं। इनकी लागत कम हो रही है और जब सही स्टेकहोल्डर्स के प्रयासों में तालमेल बनेगा, तब इसकी बाधाएं दूर होंगी। भारत में विस्तार है, यहाँ पॉलिसी में गति है तथा उद्योग में इसे बढ़ावा देने की क्षमता है।’’

