भारत का ऑटोमोबाइल क्षेत्र 2030 तक 300 बिलियन डॉलर पहुंचने के लिए तैयार 

आत्माराम सोनी.भोपाल

सीआईआई नेक्सजेन मोबिलिटी शो 2025, जिसका विषय 'नवाचार करें, एकीकृत करें, प्रभाव: मोबिलिटी का भविष्य' है  9 से 11 अक्टूबर 2025 तक पुणे अंतर्राष्ट्रीय प्रदर्शनी और कन्वेंशन सेंटर, मोशी, पुणे में आयोजित है। यह एक तीन दिवसीय शिखर सम्मेलन और प्रदर्शनी है जिसमें ऑटोमोटिव, भविष्य के ईंधन और शहरी गतिशीलता जैसे विषयों पर ध्यान केंद्रित कर रही है।  आयोजित सीआईआई नेशनल नेक्सजेन मोबिलिटी समिट शो 2025 में  मारुति सुजुकी इंडिया लिमिटेड के कार्यकारी समिति सदस्य  सीवी रमन ने कहाकि आज के युवा ग्राहक कार को अपने स्मार्टफोन का एक विस्तार मानते हैं एआई-संचालित सहायक, डिजिटल सुविधाएं और इंफोटेनमेंट ने अपेक्षाओं को बदल दिया है। तकनीक न केवल ड्राइविंग अनुभव को बेहतर बना रही है, बल्कि दुर्घटना दर को भी कम कर रही है और जटिल वाहन कार्यों को एकीकृत कर रही है। 

 टाटा मोटर्स पैसेंजर व्हीकल्स और टाटा पैसेंजर इलेक्ट्रिक मोबिलिटी  मुख्य प्रौद्योगिकी अधिकारी,  स्वेन पटुश्का ने कहाकि भारत की सॉफ्टवेयर-आधारित मोबिलिटी क्रांति का उद्देश्य सिर्फ़ तकनीक ही नहीं है यह एक नए ग्राहक परिदृश्य के बारे में है जो डिजिटल, युवा, अधिक लैंगिक विविधता वाला, पर्यावरण के प्रति जागरूक है और स्वामित्व के बजाय अनुभवों को महत्व देता है। यह बदलाव मोबिलिटी के भविष्य को नया आकार दे रहा है। 

भारत का ऑटोमोबाइल क्षेत्र, जिसका वर्तमान मूल्य 130 बिलियन अमेरिकी डॉलर है, 2030 तक बढ़कर 300 बिलियन अमेरिकी डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है, जो भारत के सकल घरेलू उत्पाद में लगभग 12 फीसदी का योगदान देगा। अकेले इलेक्ट्रिक वाहन क्षेत्र से अगले पाँच वर्षों में 20 बिलियन अमेरिकी डॉलर के निवेश को आकर्षित करने और 5 मिलियन से अधिक रोजगार सृजित करने की उम्मीद है। नेक्सजेन मोबिलिटी शो 2025, स्थायी मोबिलिटी समाधानों के लिए एक वैश्विक केंद्र बनने की दिशा में भारत की तीव्र प्रगति को रेखांकित करता है।

सीआईआई नेशनल नेक्सजेन मोबिलिटी समिट शो में ऑटोमोटिव टाटा एलेक्सी मुख्य प्रौद्योगिकी अधिकारी  सुंदर गणपति ने कहाकि  सॉफ्टवेयर-परिभाषित वाहनों में बदलाव का मतलब सिर्फ कारों में कोड जोड़ना नहीं है यह संपूर्ण ई /ई  आर्किटेक्चर की पुनर्कल्पना करना है, जो वितरित प्रणालियों से पूर्ण केंद्रीकृत इंटेलिजेंस की ओर विकसित हो रहा है। जहां उत्तरी अमेरिका, यूरोप, चीन और जापान जैसे क्षेत्र अपने-अपने दृष्टिकोण अपना रहे हैं, वहीं भारत अपनी लागत लाभ, व्यापक प्रतिभा पूल और तेज अनुसंधान एवं विकास वृद्धि के साथ अलग नजर आ रहा है। लेकिन ओईएम को यह समझना होगा कि सफलता सिर्फ 'सॉफ्टवेयर विशेषज्ञों की नियुक्ति' से नहीं मिलेगी। यह इकोसिस्टम बदलाव तय करेगा कि मोबिलिटी के भविष्य का असली नेतृत्व कौन करेगा।