एवीएस न्यूज. भोपाल/नई दिल्ली
राजधानी भोपाल सहित मध्यप्रदेश और देशभर में भाई दूज का पर्व धूमधाम से मनाया गया। यह पर्व भोपाल सहित देशभर के बाजारों में लिए खुशियों की सौगात लेकर आया। व्यापारिक संस्था कंफेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) ने बताया कि भाई दूज के अवसर पर पूरे देश में अनुमानित 22,000 करोड़ रुपए का बड़ा कारोबार हुआ।

 

 

जितना बड़ा त्यौहार उतना बड़ा व्यापार होता है:  नवनीत अग्रवाल 

यह आंकड़ा भारतीय अर्थव्यवस्था में पर्व के महत्व को दर्शाता है। तो वहीं अखिल भारतीय उद्योग व्यापार मंडल के प्रदेश महामंत्री नवनीत अग्रवाल ने बताया कि इस बड़े कारोबार में मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल का 30 करोड़ रुपए से अधिक का योगदान दिया। उन्होंने कहकि भारतीय संस्कृति और सनातन के अनुसार अब स्थित ऐसी निर्मित हो गई है कि जितना बड़ा त्यौहार उतना बड़ा व्यापार होता है।  जो भारतीय अर्थव्यवस्था को बूस्टर डोज देता है और आर्थिक स्थित को मजबूती प्रदान करता है। 

 

भाई दूज का त्योहार शहरों, कस्बों और गांवों में बड़े उत्साह के साथ मनाया गया: सुनील अग्रवाल
कैट मध्यप्रदेश इकाई के प्रदेश अध्यक्ष सुनील अग्रवाल ने बताया कि कि भाई दूज का पर्व भाई-बहन के इस विशेष बंधन का  है अत: इसे मनाने के लिए लोगों ने जमकर उपहार, मिठाई और अन्य पारंपरिक वस्तुएं खरीदीं, जिससे बाजारों में भारी उत्साह देखने को मिला। उन्होंने बताया कि कि गुरुवार को भाई दूज का त्योहार शहरों, कस्बों और गांवों में बड़े उत्साह के साथ मनाया गया। तिलक लगाने और उपहारों के आदान-प्रदान से लेकर पारिवारिक समारोहों और दावतों तक यह दिन खुशी और एकजुटता से भरा रहा।  उन्होंने कहा कि मिठाई और ड्राई फ्रूट्स, कपड़े और साड़ियां, ज्वेलरी, इलेक्ट्रॉनिक्स, घरेलू उपकरण और गिफ्ट हैंपर्स जैसी श्रेणियों में जबरदस्त मांग रही। इसके अलावा ट्रैवल, कैब सेवाएं, रेस्टोरेंट और होटलों के कारोबार में भी भारी उछाल दर्ज किया गया।


- वोकल फॉर लोकल' और 'आत्मनिर्भर भारत' को मिली मजबूती
  कैट के राष्ट्रीय महासचिव प्रवीण खंडेलवाल ने कहा कि भाई दूज केवल एक पारिवारिक त्योहार नहीं है, बल्कि यह भारत की अर्थव्यवस्था में भी महत्वपूर्ण योगदान देता है। उन्होंने बताया कि इस वर्ष के समारोहों ने सरकार के 'वोकल फॉर लोकल' और 'आत्मनिर्भर भारत' अभियानों को भी मजबूती दी। कैट ने रिपोर्ट दी कि स्वदेशी वस्तुओं की बिक्री में पिछले साल की तुलना में लगभग 50 फीसदी की वृद्धि हुई है। पारंपरिक मिठाई, हाथ से बने उपहार, ड्राई फ्रूट्स और हथकरघा कपड़ों की ज़ोरदार मांग रही। खंडेलवाल ने इस बात पर जोर दिया कि यह त्योहार भारत के गैर-कॉर्पोरेट और गैर-कृषि क्षेत्र की लचीलापन को दर्शाता है, जो देश के विकास में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। कैट का मानना है कि भाई दूज जैसे अवसर न केवल सामाजिक सद्भाव को बढ़ावा देते हैं, बल्कि उपभोक्ताओं को स्वदेशी उत्पाद चुनने के लिए प्रेरित करके भारत की पारंपरिक बाजार संस्कृति को भी पुनर्जीवित करते हैं।