सीआईआई के शिखर सम्मेलन में जुटें दुनिया भर के दिग्गज
मुंबई। भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) ने मुंबई में आयोजित छठें वैश्विक व्यापार परिदृश्य शिखर सम्मेलन में दुनियाभर के राजनयिकों, नीति निर्माताओं और उद्योग जगत के नेताओं को एफटीए, समुद्री विकास और हरित व्यापार में भारत के भविष्य की रूपरेखा तैयार करने के लिए एकजुट किया गया। सम्मेलन "बदलावों का सामना करना, भविष्य को परिभाषित करना" विषय पर आयोजित हुआ। जिसमें नीति निर्माताओं, राजनयिकों और उद्योग जगत के नेताओं ने वैश्विक वाणिज्य में भारत की उभरती भूमिका की रूपरेखा तैयार की।
उद्घाटन सत्र में भारतीय बंदरगाह संघ के सलाहकार राजीव जलोटा (आईएएस), जवाहरलाल नेहरू बंदरगाह प्राधिकरण (जेएनपीए) के विशेष आर्थिक क्षेत्र के सीईओ नितीन बोरवणकर और सिंगापुर के महावाणिज्य दूत मिंग फूंग चियोंग के साथ-साथ यूनाइटेड किंगडम, ऑस्ट्रेलिया और भारतीय उद्योग जगत के वरिष्ठ प्रतिनिधि शामिल हुए।
आयोजित इस सम्मेलन में शामिल सिंगापुर के महावाणिज्य दूत मिंग फूंग चियोंग ने डिजिटलीकरण, स्थिरता, कनेक्टिविटी, उन्नत विनिर्माण और जैव प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में भारत के साथ बढ़ते सहयोग पर जोर दिया। उन्होंने कहाकि एक तेजी से परस्पर जुड़ती दुनिया में वैश्विक व्यापार में भारत की भूमिका पहले से कहीं अधिक महत्वपूर्ण है। अपने विशाल आंतरिक बाजार, हरित संसाधनों और डिजिटल कौशल के साथ, भारत व्यापार और एकीकरण के भविष्य को आगे बढ़ाने की स्थिति में है। ब्रिटिश उप उच्चायोग के व्यापार सलाहकार मार्क बिरेल ने भारत-यूके मुक्त व्यापार समझौते की प्रगति पर प्रकाश डाला और इसे छोटे व्यवसायों और डिजिटल व्यापार के लिए एक बड़ी उपलब्धि बताया।
जिसमें वित्तीय सेवाओं पर एक महत्वाकांक्षी अध्याय भी शामिल है। ऑस्ट्रेलियाई महावाणिज्य दूतावास की कार्यवाहक उप महावाणिज्य दूत जो वुडली ने कहा कि मुक्त व्यापार समझौतों का विस्तार करने और महत्वपूर्ण खनिजों पर सहयोग करने की भारत की क्षमता महत्वपूर्ण है, जबकि व्यापक आर्थिक सहयोग समझौते का उद्देश्य आपूर्ति श्रृंखलाओं को मज़बूत करना है। उन्होंने युवाओं को प्रशिक्षित करने के लिए एक योजनाबद्ध उत्कृष्टता केंद्र का भी जिक्र किया।
- बंदरगाह, रसद और समुद्री विकास
श्री राजीव जलोटा (आईएएस) ने बताया कि विश्व व्यापार का 80 फीसदी हिस्सा समुद्री मार्ग से होता है और 2029 तक समुद्री व्यापार में सालाना 2.4 फीसदी की वृद्धि होने की उम्मीद है। उन्होंने भारत-मध्य पूर्व-यूरोप आर्थिक गलियारे (आईएमईसी) और अंतर्राष्ट्रीय उत्तर-दक्षिण परिवहन गलियारे (आईएनएसटीसी) के माध्यम से मार्गों में विविधता लाने पर भारत के ध्यान पर ज़ोर दिया।उन्होंने आगाह किया कि वैश्विक प्रतिस्पर्धा अब हरित अनुपालन पर निर्भर करती है, और बंदरगाहों से आग्रह किया कि वे स्केलेबल हरित बंकरिंग और तटीय बिजली के साथ ऊर्जा और डेटा केंद्रों में तब्दील हों।
- उद्योग और बंदरगाह मिलकर काम करते है तो बदल जाती है प्रतिस्पर्धा
जेएनपीए के सीईओ नितीन बोरवणकर ने कहा कि लॉजिस्टिक्स लागत में कमी मजबूत सहयोग, विश्वस्तरीय बुनियादी ढाँचे और सक्षम नीतियों पर निर्भर करती है। जब उद्योग और बंदरगाह एक साथ मिलकर काम करते हैं, तो दक्षता आकांक्षा से स्वाभाविक प्रतिस्पर्धा में बदल जाती है। उन्होंने बुनियादी ढाँचे, लॉजिस्टिक्स और डिजिटलीकरण को विकास के तीन प्रेरकों के रूप में पहचाना।
- लचीली आपूर्ति श्रृंखलाओं और नीतियों की आवश्यकता पर बल दिया
पीरामल एंटरप्राइजेज के मुख्य अर्थशास्त्री देबोपम चौधरी ने पूंजी प्रवाह और कार्यबल समावेशन के लिए एफटीए को एक रणनीतिक उपकरण बताया और व्यापार समझौतों के और अधिक विस्तार का आह्वान किया। एचपी इंडिया, बांग्लादेश और श्रीलंका की वरिष्ठ उपाध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक, इप्सिता दासगुप्ता ने कहाकि रत का व्यापारिक भविष्य इस बात पर निर्भर करता है कि हम आज की शक्तियों को कल के अवसरों के साथ कितनी जल्दी जोड़ते हैं, और विविध आवाजो को एक साथ लाकर एक लचीला और समावेशी मार्ग तैयार करते हैं। ब्लू स्टार लिमिटेड के अध्यक्ष, वीर आडवाणी ने उद्योगों से एक लचीले वैश्विक भविष्य को आकार देने में जुड़े रहने और सहयोग करने का आग्रह किया। अनुराग अग्रवाल ने नवाचार और स्थिरता को व्यवसायों और वैश्विक अर्थव्यवस्था को लाभ पहुंचाने वाले अवसरों को खोलने के दो इंजन के रूप में रेखांकित किया। राजरतन समूह के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक, सुनील चोर्डिया ने जलवायु परिवर्तन, संसाधनों की कमी और तकनीकी व्यवधान से निपटने के लिए लचीली आपूर्ति श्रृंखलाओं और नीतियों की आवश्यकता पर बल दिया।

