भोपाल। डॉ. आर.एस. मीणा डीएम कार्डियोलॉजी, एनंत हार्ट हॉस्पिटल भोपाल, का कहना है,  झीलों का शहर अब दिल की बीमारियों का शहर बनता जा रहा है।  तेल में तली आदतें और बढ़ता तनाव, भोपाल में बढ़ रही दिल की बीमारियों की लहर की गई है।

अस्पतालों में हर उम्र के मरीज पहुंच रहे हैं  युवा, मध्यम आयु वर्ग और बुजुर्ग, सभी दिल से जुड़ी समस्याओं से जूझ रहे हैं। कि इस बढ़ते खतरे की जड़ें हमारी रसोई और जीवनशैली में छिपी हैं। उन्होंने कहाकि भोपाल और आसपास के इलाकों में खाने की आदतें काफी बदल चुकी हैं। अत्यधिक तेल में तली-भुनी चीजें, नमकीन, समोसे, और फास्ट फूड अब रोज़मर्रा का हिस्सा बन गए हैं। इससे शरीर में खराब कोलेस्ट्रॉल बढ़ता है और दिल की धमनियां धीरे-धीरे ब्लॉक होने लगती हैं।

डॉ. मीणा बताते हैं कि पहले दिल के मरीज ज्यादातर 55 से ऊपर की उम्र के होते थे, लेकिन अब 30–40 साल के युवा भी एंजियोप्लास्टी और बायपास सर्जरी के लिए आ रहे हैं।

“समस्या यह है कि युवा खुद को फिट मानते हैं लेकिन अंदरूनी रूप से शरीर में वसा, तनाव और ब्लड प्रेशर की समस्याएं धीरे-धीरे दिल पर असर डाल रही होती हैं। लक्षण दिखने से पहले ही नुकसान हो चुका होता है,” उन्होंने कहा। भोपाल के खानपान में तेल का अत्यधिक प्रयोग, देर रात खाना, और मिठाई व स्नैक्स का ज्यादा सेवन भी बड़ा कारण बन रहा है। वहीं, लंबे ऑफिस घंटे, ट्रैफिक स्ट्रेस, और नींद की कमी ने इस खतरे को और गहरा कर दिया है। सादा खाना, नियमित योग, पैदल चलना और साल में एक बार हार्ट स्क्रीनिंग करवाना बहुत जरूरी है। खासकर 30 साल के बाद, हर व्यक्ति को ईसीजी और लिपिड प्रोफाइल जैसी जांचें करानी चाहिए।