जंग के प्रभाव से बिगड़ा नमकीन इंडस्ट्री का जायका
एवीएस न्यूज.भोपाल
अमेरिका और इजराइल-ईरान के बीच छिड़ी जंग ने दुनिया भर के कारोबारियों के सामने आई चुनौती खड़ी कर दी है तो इस वैश्विक जंग ने नमकीन, भुजिया और पापड़ आदि का जायका बिगाड़ दिया है। इस सेक्टर से जुड़े उद्योग और निर्माताओं के उत्पादन और व्यापार की रफ्तार धीमी पड़ गई है। तनाव के कारण भोपाल ही नहीं देशभर में कमर्शियल गैस सिलेंडर की भारी किल्लत और बढ़ती कीमतों का सीधा और गंभीर असर पापड़, भुजिया और नमकीन उद्योग पर पड़ा है। । गैस के अलावा पैकेजिंग सामग्री की कीमतें 30-40 फीसदी तक बढ़ गई हैं तो एडिबल ऑयल (खाद्य तेल) भी महंगा हो गया है।

खाद्य तेलों के दाम में वृद्धि का सीधा असर उत्पादन पर : प्रेमनारायण
नमकीन, भुजिया उत्पादन से जुड़े कुंदन नमकीन के प्रेमनारायण यादव के अनुसार कच्चे माल और ढुलाई आदि की बढ़ती लागत से इस सेक्टर को नुकसान हो रहा है। उन्होंने कहा कि युद्ध की वजह से माल भाड़े में भारी बढ़ोतरी हुई है और कच्चे माल की कीमतें भी बढ़ रही हैं। उन्होंने कहा कि पिछले एक महीने में खाद्य तेल की कीमत में लगभग 20 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है जिसका सीधा असर उत्पादन पर पड़ रहा है।
पैकेजिंग की लागत को 30-40 प्रतिशत तक बढ़ी
अन्य व्यापारियों ने बताया कि निर्यात के साथ-साथ पाम ऑयल और सोयाबीन जैसे जरूरी कच्चे माल के आयात पर भी असर पड़ा है। पेट्रोलियम की बढ़ती कीमतों से पैकेजिंग की लागत को 30-40 प्रतिशत तक बढ़ी है, जिससे जिससे निर्माताओं के लिए लागत अधिक आ रही है। गैस न मिलने के कारण कई निर्माता मजबूरी में कोयले की भट्टी या लकड़ी का सहारा ले रहे हैं, लेकिन इससे भी उत्पादन की गुणवत्ता और समय पर असर पड़ रहा है।
जंग की वजह से कंटेनरों की भारी कमी हो गई
वहीं बीकानेर जो नमकीन इंडस्ट्री में मशहूर नाम है का कहना है कि हमारे नमकीन और पापड़ ईरान, इराक, कतर, बहरीन, ओमान, यूएई जैसे खाड़ी देशों और ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी, इटली, स्पेन जैसे यूरोपीय देशों में भेजे जाते हैं। लेकिन जंग की वजह से कंटेनरों की भारी कमी हो गई है। पहले 15-20 कंटेनरों में भरकर सामान भेजे जाते थे, लेकिन अब इनकी कमी होने से करोड़ों रुपयों का माल बंदरगाहों पर या ट्रांजिट में फंसा हुआ है। ऊपर से एक्सपोर्ट का अभी पीक सीजन है, ऐसे में सामान भेजने में हो रही देरी और बढ़ती लागत से बीकानेर के एक्सपोर्ट-बेस्ड इंडस्ट्री पर संकट गहराता जा रहा है।

