भोपाल। वर्तमान वाहन चालक के बिना संज्ञान के केवल वाहन का फोटो खीचकर पीओएस मशीन से चालान जारी कर दिए जाते है और ऐसे फर्जी चालान वाहन के डेटाबेस में दर्ज हो जाते है जिसके कारण वाहन स्वामी को अकारण परेशानियों का सामना करना पड़ता है। अतः पीओएस के माध्यम से बने चालान के साथ चालक का नाम, फोटो एवं ड्राइविंग लाइसेंस नंबर अनिवार्य रूप से दर्ज हो तथा अपराध का मय साक्ष्य के विवरण भी दर्ज हो । यदि वाहन स्वामी 30 दिन तक चालान का शमन नहीं करना चाहता है तो उक्त चालान को संबंधित अधिकारी को नियमानुसार कोर्ट में पेश करना चाहिए और बिना कोर्ट के निर्णय के एक तरफा वाहन को ब्लैकलिस्ट न किया जाए, क्योकि यह वाहन स्वामी के संवेधानिक अधिकारों हनन है। यह बात ऑल इंडिया मोटर ट्रांसपोर्ट कांग्रेस (एआईएमटीसी) एमसी सदस्य सीएल मुकाती ने कही। 
एआईएमटीसी के मेंबर मुकाती कहा कि  अधिकारियों द्वारा बनाए गए चलानों का भी राज्य के उच्च अधिकारियों तथा एमओआरटीएच द्वारा नियमित रूप से परिक्षण किया जाना चाहिए तथा जिस अधिकारी द्वारा वाहन स्वामी को अकारण परेशान करने के उद्देश्य से चालान बनाया जाना पाया जाए।  ऐसे अधिकारियों पर कठोर कार्यवाही होना चाहिए। ताकि भारत की जीवन रेखा मानी जाने वाला ट्रांसपोर्ट व्यवसाय सुगम एवं बाधारहित रूप से संचालित होकर देश की अर्थ व्यवस्था को सुद्रढ़ कर सके। 
मुकाती ने ई-चालान प्रणाली में पारदर्शिता लाने और दुरुपयोग पर नियंत्रण करने की मांग करते हुए कहाकि अधिक से अधिक वर्चुअल कोर्ट स्थापित हो, ताकि वाहन स्वामी भटकने से बचें । चालान भुगतान की प्रक्रिया को सरल एवं पारदर्शी बनाया जाए। उन्होंने केंद्र एवं राज्य सरकार से आग्रह किया है कि एआईएमटीसी के सुझावों पर विचार कर  इन्हें एमओआरटीएच ,परिवहन मंत्रालय, पुलिस प्रशासन एवं संबंधित अधिकारियों के साथ गंभीरतापूर्वक विचार कर सुधार किया जाए , ताकि देश के वाहन स्वामियों को राहत मिल सकें और परिवहन व्यवस्था अधिक पारदर्शी और भ्रष्टाचारमुक्त बन सकें।